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जयपुर में यूजीसी कानून के खिलाफ करणी सेना का विशाल मशाल जुलूस, वीडियो में देखें युवाओं ने कानून की प्रतियां जलाकर किया विरोध

 

केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए यूजीसी कानून के खिलाफ राजस्थान की राजधानी जयपुर में बुधवार शाम विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व करणी सेना ने किया। करणी सेना के नेतृत्व में वीर दुर्गा दास सर्किल से खातीपुरा तक मशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवा हाथों में मशाल लेकर सड़कों पर उतरे और कानून के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।

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जुलूस में शामिल युवाओं ने “यूजीसी रोल बैक” और “मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।

जुलूस में हजारों युवाओं की भागीदारी रही। पुलिस की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। जुलूस का उद्देश्य कानून को वापस लेने की मांग करना और युवाओं की चिंता को केंद्र सरकार तक पहुँचाना था।

करणी सेना के नेताओं ने कहा कि यूजीसी कानून छात्रों और विश्वविद्यालयों के हित में नहीं है और इसके कई प्रावधान अस्पष्ट तथा अनुचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून सामान्य छात्रों के अधिकारों के साथ भेदभाव कर सकता है और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जुलूस में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि यूजीसी कानून को लेकर छात्रों और युवाओं में व्यापक असंतोष है। कानून के विरोध में यह पहला बड़ा प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह आंदोलन लगातार राज्य और देश के अन्य हिस्सों में भी बढ़ता दिख रहा है।

इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जुलूस मार्ग पर वाहनों और राहगीरों के लिए सुरक्षा और मार्ग व्यवधान सुनिश्चित किया। करणी सेना ने पुलिस से सहयोग का आभार जताते हुए कहा कि उनका लक्ष्य शांतिपूर्ण और कानून सम्मत तरीके से विरोध करना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बड़े जुलूस केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास हैं। युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी यह संदेश देती है कि शिक्षा और छात्र अधिकारों को लेकर युवा सजग और जागरूक हैं। करणी सेना ने आगामी दिनों में भी विरोध के अन्य सांकेतिक कार्यक्रम और रैलियां आयोजित करने का संकेत दिया। उनका कहना है कि यदि सरकार ने छात्रों की मांग पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन और तेज होगा।

इस तरह के विरोध और जुलूस यह दर्शाते हैं कि यूजीसी कानून को लेकर राजस्थान में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संवेदनशीलता है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन इस विरोध को किस तरह संभालते हैं और छात्रों और युवाओं की चिंताओं को कैसे संबोधित किया जाता है।