जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का समापन ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच इज ए डेंजरस आइडिया’ बहस के साथ
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का समापन एक महत्वपूर्ण बहस के साथ हुआ, जिसका शीर्षक था ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच इज ए डेंजरस आइडिया’। इस बहस में वक्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आवश्यकता पर जोर दिया, लेकिन साथ ही इसके जोखिमों और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर भी गंभीर विचार साझा किए।
बहस में पक्ष-विपक्ष के रूप में विभिन्न क्षेत्र के वक्ताओं ने हिस्सा लिया। इसमें राजनेता, लेखक, पत्रकार और समाजशास्त्रियों ने शामिल होकर लोकतंत्र, सत्ता और समाज पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। बहस का प्रमुख विषय यह था कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं है, बल्कि इसके साथ जिम्मेदारी और सामाजिक संवेदनशीलता भी जुड़ी होती है।
लेखकों ने बताया कि साहित्य और विचारों की स्वतंत्रता समाज में बहस और आलोचना को बढ़ावा देती है, जिससे लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि विचारों का आदान-प्रदान और मतभेद को स्वीकार करना नागरिकों के सोचने की क्षमता को विकसित करता है। लेखक और पत्रकारों ने इस बात पर भी जोर दिया कि बिना भय के अपने विचार व्यक्त करना समाज की स्वस्थ परंपरा के लिए आवश्यक है।
वहीं, विपक्ष में शामिल वक्ताओं ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कई बार सामाजिक तनाव और मतभेद भी पैदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि बिना संवेदनशीलता के की गई अभिव्यक्ति समाज में असहिष्णुता और हिंसा को जन्म दे सकती है। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि स्वतंत्रता का दुरुपयोग रोकने के लिए कानून और नैतिकता का संतुलन जरूरी है।
राजनीतिक नेताओं ने बहस में लोकतंत्र और सत्ता के दृष्टिकोण से यह मुद्दा उठाया कि अभिव्यक्ति की आजादी सत्ता के विरोध और आलोचना का माध्यम भी बनती है। उन्होंने कहा कि यह शक्ति समाज के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। नेताओं ने नागरिकों को जिम्मेदार और समझदार होकर अभिव्यक्ति का प्रयोग करने पर जोर दिया।
लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजकों ने बताया कि इस बहस का उद्देश्य केवल विचारों का आदान-प्रदान करना नहीं था, बल्कि समाज में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जागरूकता और गंभीर विमर्श को बढ़ावा देना भी था। उन्होंने कहा कि फेस्टिवल के दौरान हुई सभी बहसें और कार्यक्रम युवाओं, शोधकर्ताओं और नागरिकों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ जैसे विषय पर बहस केवल विचारों को चुनौती देने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज को आलोचनात्मक सोच, सहिष्णुता और जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाता है। बहस के दौरान दर्शकों ने भी सक्रिय भागीदारी की और सवाल-जवाब सत्र में अपने विचार साझा किए।
इस बहस के साथ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का समापन हुआ। आयोजकों ने कहा कि आने वाले वर्षों में भी ऐसे विषयों पर बहस आयोजित की जाएगी, जो समाज और लोकतंत्र के लिए प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हों। फेस्टिवल ने न केवल साहित्य और विचारों का मंच प्रस्तुत किया, बल्कि विचारों की स्वतंत्रता और उसकी चुनौतियों पर गंभीर विमर्श का अवसर भी प्रदान किया।