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जयपुर के 350 करोड़ के रोप-वे प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट की रोक, वीडियो में जाने टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

 

राजस्थान के सबसे बड़े प्रस्तावित रोप-वे प्रोजेक्ट पर बड़ा कानूनी झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जयपुर के बहुचर्चित रोप-वे प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह प्रोजेक्ट Amer Fort, Jaigarh Fort और Nahargarh Fort को एक साथ जोड़ने के लिए प्रस्तावित था, जिसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना था।करीब 6.5 किलोमीटर लंबे इस रोप-वे प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 2 फरवरी को दी गई सरकारी मंजूरी पर भी रोक लगा दी है।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अभि गोयल और हार्दिक मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि जिस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 80 करोड़ रुपये थी, उसे बाद में बढ़ाकर 350 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और आर्थिक रूप से अधिक बोली लगाने वाली फर्म को अनुचित रूप से काम दिया गया।अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि कम लागत में परियोजना तैयार करने की क्षमता रखने वाली कंपनी को नजरअंदाज कर अधिक लागत वाली बोली को मंजूरी देना गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर जैन ने फिलहाल परियोजना पर आगे की कार्रवाई रोकने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मई को तय की है।सरकारी योजना के अनुसार यह रोप-वे प्रोजेक्ट जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़कर शहर में पर्यटन को नई ऊंचाई देने वाला था। इससे पर्यटकों को तीनों ऐतिहासिक किलों का एक साथ अनुभव मिलना प्रस्तावित था, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी।हालांकि अब हाईकोर्ट की रोक के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य फिलहाल अनिश्चित हो गया है। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को अब अदालत में अपनी प्रक्रिया और टेंडर निर्णय को स्पष्ट करना होगा। फिलहाल यह मामला राजस्थान की बड़ी विकास परियोजनाओं और पारदर्शी टेंडरिंग प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है।