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समर कैंप में बच्चों को मिल रही कैलीग्राफी की नॉलेज, वीडियो में जानें पौधारोपण सीखा दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

 

गर्मी की छुट्टियों को रचनात्मक ढंग से बिताने के लिए जवाहर कला केंद्र में चल रहे जूनियर समर कैंप में बच्चों को विभिन्न कलात्मक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कैंप में बच्चे न सिर्फ कला की बारीकियों को सीख रहे हैं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझ रहे हैं।

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इसी श्रृंखला में बुधवार को कैंप में "स्टोरी ट्री" विधा की एक अनूठी क्लास का आयोजन किया गया। इस क्लास में बच्चों को पौधारोपण की विधि सिखाई गई और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला गया। बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ पौधे लगाए और उन्हें नियमित रूप से जल देने तथा उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।

इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों में प्रकृति के प्रति लगाव पैदा करना और पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति उन्हें जागरूक बनाना था। प्रशिक्षकों ने बच्चों को बताया कि हर पौधा न केवल ऑक्सीजन देता है, बल्कि धरती को हरा-भरा और संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।

कक्षा में 'स्टोरी ट्री' के माध्यम से बच्चों को पेड़ों और पर्यावरण से जुड़ी कहानियां सुनाई गईं, जिससे उनमें सीखने की रुचि और संवेदनशीलता का विकास हो। बच्चों ने अपनी-अपनी कहानियों में पेड़ों को पात्र बनाकर रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे उनमें कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति कौशल का भी विकास हुआ।

इसके साथ ही, कार्यक्रम में कैलीग्राफी की विशेष क्लास का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को सुंदर और रचनात्मक ढंग से लेखन की कला सिखाई जा रही है। प्रशिक्षक बच्चों को विभिन्न फॉन्ट्स, लेखन शैली और लेआउट के बारे में जानकारी दे रहे हैं। बच्चे रंग-बिरंगे पेन और ब्रश से आकर्षक अक्षर बनाना सीख रहे हैं, जिससे उनकी लेखन कला में निखार आ रहा है।

जवाहर कला केंद्र के समर कैंप का उद्देश्य बच्चों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सीखने का एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां वे विभिन्न कलाओं से परिचित हों, अपने भीतर की रचनात्मकता को पहचानें और सामाजिक व नैतिक मूल्यों को आत्मसात करें।

कैंप में भाग ले रहे बच्चों के माता-पिता ने भी कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ बच्चों के समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

जवाहर कला केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, समर कैंप में आगे भी पेंटिंग, नृत्य, रंगमंच, मिट्टी कला, संगीत जैसी कई अन्य विधाओं की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें अनुभवी कलाकार बच्चों को मार्गदर्शन देंगे।