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जयपुर में दोस्ती के नाम पर रेस्टोरेंट मालिक को बनाया साइबर ठगी का मोहरा, वीडियो में जाने बैंक अकाउंट में मंगवाता था ठगी का पैसा

 

जयपुर में दोस्ती कर एक रेस्टोरेंट मालिक को साइबर ठगी के मामले में फंसाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक साइबर क्रिमिनल ने रेस्टोरेंट मालिक का विश्वास जीतकर उसके बैंक अकाउंट की जानकारी हासिल की और इसके बाद ठगी की रकम उसके खाते में मंगवाने लगा। खाते में पैसा आने के बाद आरोपी कथित तौर पर रेस्टोरेंट मालिक के मोबाइल में नेट बैंकिंग और यूपीआई की मदद से रकम को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता था। बैंक अकाउंट होल्ड होने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

मामला जयपुर के महेश नगर थाना क्षेत्र का है। पीड़ित रेस्टोरेंट मालिक की पहचान सत्येंद्र के रूप में हुई है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, सत्येंद्र की एक व्यक्ति से दोस्ती हुई थी। बातचीत के दौरान आरोपी ने उसका विश्वास जीत लिया। इसके बाद उसने किसी काम के लिए सत्येंद्र से उसके बैंक अकाउंट नंबर की जानकारी मांगी। दोस्ती और विश्वास के चलते सत्येंद्र ने उसे अपना बैंक अकाउंट नंबर उपलब्ध करा दिया।

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आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने साइबर ठगी के लिए सत्येंद्र के बैंक खाते का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। अलग-अलग लोगों से की गई कथित साइबर ठगी की रकम सत्येंद्र के बैंक अकाउंट में मंगवाई जाती थी। रकम खाते में आने के बाद आरोपी जालसाजी के जरिए उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता था।पुलिस के अनुसार, आरोपी ने रेस्टोरेंट मालिक के मोबाइल में मौजूद नेट बैंकिंग और यूपीआई का इस्तेमाल कर रकम को दूसरे खातों में भेजा। पीड़ित को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा है।

कुछ समय बाद जब बैंक अकाउंट होल्ड हो गया तो सत्येंद्र को मामले की जानकारी हुई। बैंक खाते पर कार्रवाई होने के बाद उसने संबंधित बैंक से जानकारी लेने का प्रयास किया। इसी दौरान उसे पता चला कि उसके खाते में ऐसी रकम का लेनदेन हुआ है, जिसका संबंध साइबर ठगी से हो सकता है। इसके बाद पीड़ित को समझ आया कि उसके साथ धोखे से उसके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया गया है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद सत्येंद्र ने महेश नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक खाते में हुए लेनदेन, यूपीआई ट्रांजैक्शन और नेट बैंकिंग के जरिए किए गए ट्रांसफर की जानकारी जुटा रही है। साथ ही उस व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर रेस्टोरेंट मालिक का विश्वास जीतकर उसके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया।

साइबर अपराध के मामलों में अक्सर अपराधी किसी व्यक्ति का विश्वास जीतकर उसके बैंक खाते, मोबाइल या डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारी हासिल करते हैं। बाद में इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को दूसरे खातों तक पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। ऐसे मामलों में खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है, भले ही उसे लेनदेन की पूरी जानकारी न हो।पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी परिचित या दोस्त के कहने पर भी बैंक अकाउंट, नेट बैंकिंग, यूपीआई पिन, ओटीपी या मोबाइल की डिजिटल बैंकिंग सुविधा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। बैंक खाते में अनजान स्रोत से पैसा आने पर उसे खुद से कहीं ट्रांसफर करने के बजाय तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें।