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जयपुर में बंगाल चुनाव का असर: घर-घर किचन संकट, बर्तन और कामकाज ठप, शहर में बढ़ी मुश्किलें

 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का असर अब राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी साफ दिखाई देने लगा है। चुनावी माहौल और मतदान के लिए अपने गृह राज्य लौट रहे प्रवासी श्रमिकों की बड़ी संख्या ने शहर की दैनिक जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। खासकर घरेलू कामकाज, होटल-रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों में अचानक श्रमिकों की कमी से “किचन क्राइसिस” की स्थिति बन गई है।

जानकारी के अनुसार, जयपुर में काम करने वाले बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक पश्चिम बंगाल के कूचबिहार और आसपास के क्षेत्रों से आते हैं। इनमें से कई लोग मतदान के लिए अपने गांव लौट रहे हैं। इसके चलते शहर के कई इलाकों में घरेलू सहायकों की भारी कमी देखी जा रही है। घरों में रसोई का काम, सफाई और दैनिक कार्य प्रभावित हो गए हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुबह से लेकर शाम तक घरों में कामकाज पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। कई घरों में बर्तन तक बिना धुले पड़े हैं और रसोई का पूरा सिस्टम अस्त-व्यस्त हो गया है। कुछ परिवारों को मजबूरी में वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है, जबकि कई जगह कामकाजी स्टाफ की अनुपस्थिति से परेशानी बढ़ गई है।

इसी तरह होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर भी इस संकट से अछूता नहीं है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कई जगह सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। रसोई स्टाफ की कमी से ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारिक संगठनों के अनुसार, यह समस्या अचानक नहीं बल्कि हर चुनावी सीजन में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार श्रमिकों की बड़ी संख्या में वापसी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खासकर घरेलू कामकाज पर निर्भर परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी श्रमिक शहरों की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन की रीढ़ हैं। ऐसे में जब वे एक साथ छुट्टी पर या मतदान के लिए लौटते हैं, तो इसका सीधा असर शहरी व्यवस्था पर पड़ता है।

फिलहाल जयपुर में यह स्थिति कुछ दिनों तक बनी रहने की संभावना है, जब तक कि चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और श्रमिक वापस काम पर नहीं लौट आते। प्रशासन और स्थानीय संस्थाएं वैकल्पिक व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही हैं ताकि लोगों को राहत मिल सके।