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राजस्थान में होलिका दहन समारोह, वीडियो में देखें जयपुर और भीलवाड़ा में परंपरा के रंग

 

राजस्थान में सोमवार रात को होली पर्व की शुरुआत होलिका दहन के साथ हुई। जयपुर और भीलवाड़ा में अलग-अलग स्थानों पर इस परंपरागत रस्म का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय लोग और श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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जयपुर के सिटी पैलेस में मुहूर्त के अनुसार रात 1 बजकर 26 मिनट पर होलिका दहन किया गया। इस अवसर पर पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने होलिका दहन की अग्नि प्रज्वलित की। इसके बाद जयपुर के नागरिक परंपरा के अनुसार अग्नि लेकर अपने-अपने घरों और मोहल्लों के लिए रवाना हुए। लोगों ने पारंपरिक गीत और भजन गाते हुए रंगों और उमंग के साथ अग्नि की लपटों का स्वागत किया।

इससे पहले जयपुर शहर के जवाहर नगर में शाम करीब 7 बजे भी होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। शाम ढलते ही होलिका की अग्नि से वातावरण में उल्लास और उत्साह का माहौल छा गया। बच्चों और बुजुर्गों ने मिलकर गुलाल और रंगों के साथ इस पर्व को मनाया।

भीलवाड़ा के पंचमुखी मोक्ष धाम में भी होलिका दहन के बाद एक विशेष परंपरा निभाई गई। यहां चिता की राख का उपयोग करके श्मशान में होली खेली गई। इस अवसर पर भेरुजी की सवारी भी मोक्ष धाम परिसर में निकाली गई। भैरुजी के भक्त झूमते-गाते हुए चिता की राख से होली खेलते दिखाई दिए। इस अनोखे उत्सव ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भावविभोर कर दिया।

पंचमुखी मोक्ष धाम में आयोजित इस अनुष्ठान का उद्देश्य परंपरा और संस्कृति को जीवित रखना है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह आयोजन सदियों से चलता आ रहा है और भक्तों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भक्तों का मानना है कि चिता की राख से होली खेलना शुभ माना जाता है और इससे बुराइयों का नाश होता है।

जयपुर और भीलवाड़ा दोनों ही स्थानों पर होलिका दहन के बाद सुरक्षा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने कार्यक्रम स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और आग सुरक्षा के इंतजाम किए। आग बुझाने के यंत्र और चिकित्सा सुविधा भी मौके पर उपलब्ध कराई गई, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। परिवार और समुदाय के लोग इस पर्व में एक साथ जुटते हैं, पारंपरिक गीतों और लोक नृत्यों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ हर्ष और उल्लास साझा करते हैं।

इस प्रकार, राजस्थान में सोमवार रात को होलिका दहन के अवसर पर जयपुर और भीलवाड़ा के श्रद्धालुओं ने परंपरा और धार्मिक आस्था के साथ पर्व का आनंद लिया। अगले दिन से शुरू होने वाली होली (धुलंडी) के रंगोत्सव के लिए यह समारोह पहले से ही उत्साह और उमंग का संकेत बना।