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गोविंद देवजी मंदिर में आस्था और उल्लास की रंगत, भक्तों ने भक्ति भाव से खेली होली

 

गोविंद देवजी मंदिर में होली के अवसर पर आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। ठाकुरजी के दरबार में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर रंग, गुलाल और फूलों की खुशबू से सराबोर नजर आया। भक्तों ने भक्ति भाव के साथ होली खेलते हुए ठाकुरजी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

सुबह मंगला आरती के साथ ही उत्सव की शुरुआत हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। देश-विदेश से आए भक्तों ने ठाकुरजी के दर्शनों के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया। मंदिर प्रशासन की ओर से भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।

होली के अवसर पर ठाकुरजी को विशेष श्रृंगार से सजाया गया। रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक पोशाक और पारंपरिक आभूषणों से सुसज्जित विग्रह के दर्शन करते ही भक्त भाव-विभोर हो उठे। जैसे ही पुजारियों द्वारा गुलाल अर्पित किया गया, पूरा दरबार ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद श्रद्धालुओं पर भी गुलाल और पुष्पों की वर्षा की गई, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।

ढोल-नगाड़ों की थाप और भजनों की मधुर धुनों ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। मंदिर परिसर में फाग और होली के पारंपरिक भजन गाए गए, जिन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। महिलाएं और पुरुष अलग-अलग समूहों में भक्ति गीतों पर थिरकते दिखाई दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लोग इस रंगोत्सव में पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए।

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन की ओर से भी पुख्ता व्यवस्था की गई थी। मंदिर के आसपास यातायात को नियंत्रित किया गया और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। चिकित्सा और पेयजल की भी व्यवस्था की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

गोविंद देवजी मंदिर में होली का यह उत्सव केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि भक्ति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यहां खेली जाने वाली होली में मर्यादा और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस विशेष अवसर का हिस्सा बनने के लिए जयपुर पहुंचते हैं।

इस प्रकार, ठाकुरजी के दरबार में आस्था, संगीत और रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने होली के पर्व को और भी विशेष बना दिया।