×

नीरजा मोदी स्कूल को हाईकोर्ट से एक महीने की राहत, फुटेज में जानें छात्रों के शिफ्ट पर लगी रोक

 

राजधानी जयपुर स्थित नीरजा मोदी स्कूल को राजस्थान हाईकोर्ट से अस्थायी राहत मिली है। जस्टिस बिपिन गुप्ता की बेंच ने स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा छात्रों को दूसरी स्कूलों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर एक महीने तक रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने इस चरण पर स्कूल की सीबीएसई मान्यता रद्द करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/fbhkhjGP7xk?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/fbhkhjGP7xk/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत दी जा रही है, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। अदालत के आदेश के अनुसार, क्लास 9 और 11 के छात्रों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर एक महीने तक रोक रहेगी। इससे स्कूल, अभिभावकों और छात्रों को अस्थायी राहत मिली है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर सीबीएसई के समक्ष अपना रिप्रजेंटेशन (प्रतिवेदन) प्रस्तुत करे। वहीं, सीबीएसई को निर्देश दिए गए हैं कि वह स्कूल द्वारा दिए गए रिप्रजेंटेशन पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय करे। तब तक छात्रों को दूसरी स्कूलों में स्थानांतरित करने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस आदेश को सीबीएसई की मान्यता रद्द करने के निर्णय पर अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाए। यानी, सीबीएसई द्वारा स्कूल की मान्यता समाप्त करने का आदेश फिलहाल प्रभावी रहेगा, लेकिन उसके आधार पर छात्रों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई गई है।

गौरतलब है कि सीबीएसई द्वारा मान्यता रद्द किए जाने के बाद छात्रों और अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बन गई थी। खासतौर पर बोर्ड परीक्षा से पहले कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता जताई जा रही थी। इसी को आधार बनाकर स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि अचानक स्कूल बदलने से बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता था। वहीं स्कूल प्रबंधन ने भी अदालत के निर्देशों का पालन करने और सीबीएसई के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखने की बात कही है।

अब सभी की नजरें सीबीएसई के उस फैसले पर टिकी हैं, जो वह स्कूल के रिप्रजेंटेशन पर तीन सप्ताह के भीतर लेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि नीरजा मोदी स्कूल के छात्रों का भविष्य किस दिशा में जाएगा।