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आरयू वीसी नियुक्ति को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता पर हाईकोर्ट सख्त, फुटेज में जानें क्यों लगा 5 लाख रुपये का जुर्माना?

 

राजस्थान यूनिवर्सिटी (आरयू) की कुलपति (वीसी) प्रोफेसर अल्पना कटेजा की नियुक्ति को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रोफेसर महिपाल सिहाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ता पहले जुर्माने की राशि जमा करवाएगा, उसके बाद ही उसकी याचिका पर आगे सुनवाई की जाएगी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका में लगाए गए आरोपों और सरकार की ओर से पेश किए गए तथ्यों को गंभीरता से सुना। प्रोफेसर महिपाल सिहाग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि राजस्थान यूनिवर्सिटी की वीसी अल्पना कटेजा ने अपनी नियुक्ति के समय आवेदन पत्र में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाई थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि इस वजह से उनकी नियुक्ति नियमों के विपरीत हुई है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

हालांकि, सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश पक्ष ने पूरे मामले को अलग ही मोड़ दे दिया। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि जिस आधार पर याचिकाकर्ता ने वीसी की नियुक्ति को चुनौती दी है, वही गलती खुद याचिकाकर्ता ने की है। सरकार ने कोर्ट में तथ्य रखते हुए कहा कि प्रोफेसर महिपाल सिहाग ने भी वीसी पद के लिए आवेदन करते समय अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई थी। ऐसे में याचिकाकर्ता को इस तरह की याचिका दायर करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।

सरकार की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने तथ्यों को छुपाकर और चयन प्रक्रिया को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की है। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।

जस्टिस समीर जैन की अदालत ने आदेश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक याचिकाकर्ता यह जुर्माना राशि जमा नहीं कराता, तब तक उसकी याचिका पर कोई सुनवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट के इस आदेश को भविष्य में इस तरह की याचिकाओं पर रोक लगाने के रूप में भी देखा जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है कि बिना ठोस आधार और साफ नीयत के दायर की गई याचिकाओं को अदालत गंभीरता से नहीं लेगी। साथ ही, तथ्य छुपाकर न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, इस मामले में अगली सुनवाई याचिकाकर्ता द्वारा जुर्माना राशि जमा कराने के बाद ही संभव हो पाएगी। वहीं, राजस्थान यूनिवर्सिटी की वीसी अल्पना कटेजा की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद इस आदेश के बाद काफी हद तक शांत होता नजर आ रहा है।