पानी की समस्या को लेकर गहलोत का भाजपा सरकार पर हमला, वीडियो में बोले- 'पानी मांगोगे तो जेल जाओगे'
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर जिले के धुंधाड़ा गांव में पानी की समस्या को लेकर भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में जनता अपनी मूलभूत जरूरतों की मांग भी नहीं कर सकती।
गहलोत ने X पर साधा निशाना
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "पानी मांगोगे तो जेल जाओगे। राजस्थान में भाजपा सरकार का नया 'डबल इंजन' सर्कस है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि जोधपुर के धुंधाड़ा गांव में ग्रामीणों ने केवल अपनी पानी की समस्या मंत्री के सामने रखी थी, लेकिन उनकी मांग पूरी करने के बजाय उनके खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया गया।
मंत्री जोगाराम पटेल के गांव का मामला
गहलोत ने कहा कि धुंधाड़ा गांव, राज्य के कानून मंत्री जोगाराम पटेल का पैतृक गांव है। ग्रामीणों ने मंत्री के दौरे के दौरान क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का मुद्दा उठाया और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की थी।
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीणों को पानी की सुविधा देने के बजाय जलदाय विभाग की ओर से उनके खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कराया गया।
सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल
गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि जनता अपनी मूलभूत आवश्यकताओं, विशेषकर पेयजल जैसी जरूरी सुविधा की मांग भी नहीं कर सकती, तो यह चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने सवाल किया, "क्या सरकार और उसके मंत्री जनता की इस बुनियादी जरूरत को भी पूरा नहीं कर सकते?"
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष जहां सरकार को जनता की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पानी की समस्या बना राजनीतिक मुद्दा
राजस्थान के कई क्षेत्रों में गर्मी के मौसम के दौरान पेयजल संकट एक प्रमुख मुद्दा बना रहता है। ऐसे में धुंधाड़ा गांव का मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पानी की मांग को लेकर उठे विवाद पर आने वाले दिनों में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, ग्रामीणों की शिकायतों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा जारी है तथा सभी की नजरें सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।