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पूर्व मंत्री महेश जोशी ने किया सरेंडर, वीडियो में जानें मांगी 9 दिन की राहत, कब आएगा फैसला

 

जल जीवन मिशन में हुए 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में आरोपी राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी की अंतरिम जमानत याचिका पर गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। हालांकि, अदालत ने गुरुवार को कोई फैसला नहीं सुनाया और अब इस याचिका पर फैसला शुक्रवार को सुनाया जाएगा। इस बीच, अंतरिम जमानत की मियाद खत्म होने पर महेश जोशी ने जयपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर सरेंडर कर दिया। अब उन्हें रात जेल में ही गुजारनी पड़ी।

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पूर्व मंत्री महेश जोशी पर आरोप है कि उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत टेंडर आवंटन, ठेके और फंड वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में व्यापक जांच करते हुए कई दस्तावेजी सबूत और बयान इकठ्ठा किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले में कई वरिष्ठ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से धन की हेराफेरी की गई।

गुरुवार को महेश जोशी की अंतरिम जमानत याचिका पर कोर्ट में तीखी बहस हुई। ईडी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि जोशी को जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं, महेश जोशी के वकीलों ने कोर्ट से अपील की कि उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने की इच्छा है और उन्हें राहत दी जाए।

हालांकि कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और कहा कि इस पर निर्णय शुक्रवार को सुनाया जाएगा। चूंकि उनकी अंतरिम जमानत की अवधि गुरुवार को समाप्त हो गई थी, ऐसे में जोशी को मजबूरन जयपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना पड़ा। नियमों के तहत उन्हें कोर्ट के आदेश के बिना जेल से रिहाई संभव नहीं थी, जिस कारण अब उन्हें कम से कम एक रात जेल में बितानी पड़ेगी।

राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हलचल बनी हुई है। महेश जोशी कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। इस मामले के चलते पार्टी की छवि पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

अब सबकी निगाहें शुक्रवार को आने वाले कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि जोशी को फिलहाल राहत मिलेगी या उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा। अगर कोर्ट उनकी याचिका खारिज करता है, तो यह उनके लिए बड़ा झटका होगा और मामले की जांच और भी गहराई से आगे बढ़ सकती है।