वीडियो में देखें जयपुर की सड़कों पर दिखी भारतीय सेना की ताकत, पहली बार शहर में हुई आर्मी-डे परेड
जयपुर गुरुवार को भारतीय सेना की शौर्य, शक्ति और आधुनिक तकनीक का गवाह बना। आर्मी एरिया से बाहर पहली बार आर्मी-डे परेड का आयोजन जयपुर में किया गया, जिसने आम लोगों को सेना की ताकत को बेहद करीब से देखने का अवसर दिया। जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित इस भव्य परेड को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़े और देशभक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
परेड के दौरान जयपुर की सड़कों पर भारतीय सेना के अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य साजो-सामान का शानदार प्रदर्शन किया गया। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस, अत्याधुनिक भीष्म टैंक, स्वदेशी अर्जुन टैंक और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर पिनाका को देखकर लोग रोमांचित हो उठे। इसके साथ ही आधुनिक युद्ध प्रणाली का प्रतीक बन चुके रोबोटिक डॉग्स का भी प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा।
आसमान में भारतीय वायुसेना के अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे ने दुश्मनों के होश उड़ाने वाले करतब दिखाए। हेलिकॉप्टर की फुर्ती और सटीकता को देखकर लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ जवानों का उत्साह बढ़ाया। वहीं बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़ान भरकर आए जगुआर फाइटर जेट ने भी अपनी ताकत और तकनीकी खूबियों का प्रदर्शन किया। आम लोग पहली बार इतने करीब से फाइटर जेट की क्षमताओं से रू-ब-रू हुए।
इस ऐतिहासिक अवसर पर सेना के जवानों की परेड, अनुशासन और समन्वय ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के लोगों में भारतीय सेना को लेकर गर्व और सम्मान की भावना साफ नजर आई। देशभक्ति के नारों और तालियों के बीच पूरा इलाका सेना के शौर्य के रंग में रंग गया।
हालांकि इस गौरवपूर्ण आयोजन के बीच एक भावुक पल भी सामने आया। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 1 पैरा स्पेशल फोर्स के जवान लांस नायक प्रदीप कुमार की मां को मंच पर सेना मेडल प्रदान किया जा रहा था। अपने वीर बेटे के बलिदान को याद करते हुए वह मंच पर ही बेहोश हो गईं। मौके पर मौजूद सैन्य अधिकारियों ने तुरंत उन्हें संभाला और प्राथमिक सहायता दी। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। इस दृश्य ने वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं।
आर्मी-डे परेड के माध्यम से सेना ने न केवल अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारतीय सेना देश की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार है। जयपुर में पहली बार हुए इस आयोजन ने आम जनता और सेना के बीच दूरी को कम किया और लोगों को अपने जवानों के साहस और बलिदान से सीधे जोड़ दिया। यह परेड निस्संदेह जयपुर के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गई।