राजस्थान हाईकोर्ट में आपातकालीन सेवाओं की खुली पोल, एक्सक्लूसिव फुटेज में देंखे घायल महिला वकील के लिए नहीं मिला एम्बुलेंस ड्राइवर
राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में शुक्रवार को उस समय आपातकालीन व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां उजागर हो गईं, जब एक घायल महिला वकील को अस्पताल ले जाने के लिए मौजूद एम्बुलेंस में ड्राइवर ही नहीं मिला। यह घटना हाईकोर्ट जैसी संवेदनशील और प्रतिष्ठित संस्था में आपात सेवाओं की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। हालात ऐसे बने कि एक वकील को खुद एम्बुलेंस चलाकर घायल महिला वकील को अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट परिसर में एक महिला वकील के घायल होने के बाद तुरंत एम्बुलेंस बुलाने की जरूरत पड़ी। एम्बुलेंस तो मौके पर मौजूद थी, लेकिन जब उसे अस्पताल ले जाने की बात आई तो पता चला कि एम्बुलेंस का ड्राइवर मौके पर ही नहीं है। वकीलों ने जब ड्राइवर की तलाश की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि संबंधित ड्राइवर उस दिन हाईकोर्ट आया ही नहीं था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वकील रविन्द्र सिंह शेखावत ने बिना समय गंवाए खुद एम्बुलेंस की कमान संभाली। उन्होंने घायल महिला वकील को हाईकोर्ट परिसर से एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाया। इस दौरान वकील सतीश खंडेलवाल ने भी उनकी सहायता की। अस्पताल पहुंचने पर महिला वकील को भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।
घायल महिला वकील को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने के बाद वकील रविन्द्र सिंह शेखावत ने एम्बुलेंस को वापस हाईकोर्ट परिसर लाकर उसके निर्धारित स्थान पर पार्क किया। इस पूरे घटनाक्रम ने हाईकोर्ट में मौजूद वकीलों और कर्मचारियों को झकझोर कर रख दिया। वकीलों का कहना है कि यदि समय पर सही व्यवस्था नहीं होती और कोई गंभीर स्थिति होती, तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते थे।
घटना के बाद हाईकोर्ट परिसर में वकीलों में गहरी नाराजगी देखने को मिली। वकीलों का कहना है कि हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में आपातकालीन सेवाओं का इस तरह लापरवाह होना बेहद चिंताजनक है। उनका आरोप है कि एम्बुलेंस का ड्राइवर ड्यूटी पर नहीं आना सीधे तौर पर घोर लापरवाही का मामला है, जिस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
वकीलों ने मांग की है कि हाईकोर्ट प्रशासन आपातकालीन सेवाओं की तत्काल समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वकील, पक्षकार और आम लोग आते हैं, ऐसे में किसी भी समय मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस और प्रशिक्षित स्टाफ का हर समय उपलब्ध रहना बेहद जरूरी है।
वकीलों ने यह भी मांग की कि लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अपनी जिम्मेदारी से बचने की हिम्मत न कर सके। साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट परिसर में मेडिकल सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कागजों पर बनी व्यवस्थाएं और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आपातकालीन सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाता है।