×

SMS हॉस्पिटल में राजस्थान के मरीज से इलाज के रुपए मांगे, फुटेज में जानें डीग को राज्य से बाहर बताया, रजिस्ट्रेशन पर्ची से लेकर जांच तक के पैसे लिए

 

राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस (Sawai Man Singh) अस्पताल में सिस्टम की खामियों के चलते एक मरीज और उसके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि डीग जिले की एक महिला मरीज को गलत तरीके से दूसरे राज्य का नागरिक बताकर न केवल रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूला गया, बल्कि जांच के लिए भी पैसे मांगे गए।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/s2hEeZJHKF4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/s2hEeZJHKF4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

इलाज के लिए आई थी महिला मरीज

डीग जिले की रहने वाली 58 वर्षीय जड़ावो देवी 10 मई की शाम को अपने बेटे केदार के साथ इलाज के लिए जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल पहुंची थीं। उन्हें गठिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती और जांच करानी थी। परिजन रातभर अस्पताल परिसर में ही मरीज के साथ रुके रहे और अगले दिन सुबह रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुंचे।

रजिस्ट्रेशन में हुई बड़ी गलती

11 मई की सुबह जब मरीज के बेटे ने काउंटर पर आधार कार्ड और जनआधार कार्ड प्रस्तुत किया और खुद को डीग जिले का निवासी बताया, तो आरोप है कि काउंटर ऑपरेटर ने गलती से या लापरवाही के चलते उन्हें बाहरी राज्य का मरीज दर्ज कर दिया। इसके बाद उनसे रजिस्ट्रेशन पर्ची के लिए 10 रुपये शुल्क भी वसूला गया।

जांच के नाम पर भी मांगे गए पैसे

मामला यहीं नहीं रुका। डॉक्टर को दिखाने के बाद जब मरीज के परिजन जांच के लिए बिल कटवाने पहुंचे, तो उनसे 1100 रुपये की मांग की गई। इस पर परिजनों ने आपत्ति जताई और इसे सरकारी सुविधा के नियमों के खिलाफ बताया।

शिकायत के बावजूद नहीं हुई सुनवाई

परिजनों का कहना है कि उन्होंने तुरंत इस गलत एंट्री और अतिरिक्त शुल्क वसूली की शिकायत संबंधित कर्मचारियों और काउंटर पर की, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया और कोई समाधान नहीं हुआ।

सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल

इस घटना ने एसएमएस अस्पताल की व्यवस्थाओं और रजिस्ट्रेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही आम जनता को परेशान करती है और इलाज प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है।