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राजनीति में निष्पक्षता पर बहस तेज: वीडियो में देंखे गहलोत का बयान—“प्रधानमंत्री सभी का होता है, किसी एक पार्टी का नहीं”

 

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री पद की भूमिका और उसके दायित्वों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद कोई भी नेता सिर्फ एक पार्टी का प्रतिनिधि नहीं रह जाता, बल्कि वह पूरे देश और सभी नागरिकों का प्रतिनिधि बन जाता है।

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गहलोत ने यह टिप्पणी दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान की। इस अवसर पर उन्होंने राजीव गांधी को याद करते हुए देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी राजनीति पर भी जोर दिया।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सभी राजनीतिक दलों, विचारधाराओं और नागरिकों के प्रति समान भाव रखें। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री बनने के बाद नेता सभी पार्टियों का होता है, क्योंकि देश के सभी लोग उसके अपने होते हैं।”

इसी संदर्भ में गहलोत ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से अभी यह भावना पूरी तरह दिखाई नहीं देती। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री को सभी दलों और विचारधाराओं के साथ समान व्यवहार और संवाद बनाए रखना चाहिए।गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि शीर्ष नेतृत्व निष्पक्षता और समावेशी दृष्टिकोण अपनाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे नेता सभी वर्गों और दलों को साथ लेकर चलते हैं, तो इससे राजनीतिक वातावरण अधिक संतुलित और मजबूत बनता है।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की यह एक महत्वपूर्ण व्याख्या है, जबकि विरोधियों का मानना है कि यह राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित टिप्पणी है।फिलहाल गहलोत के बयान ने एक बार फिर केंद्र और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस को हवा दे दी है, और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।