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राजस्थान में ठेकेदारों का विरोध तेज, वीडियो में देंखे 3500 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा

 

राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से जुड़े ठेकेदारों ने बकाया भुगतान को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। पिछले पांच दिनों से प्रदेशभर से आए ठेकेदार जलदाय भवन के बाहर धरना दे रहे हैं और लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।ठेकेदारों का आरोप है कि पिछले 33 महीनों से उनके करीब 3500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। उनका कहना है कि लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और कई छोटे-मध्यम स्तर के ठेकेदार संकट में आ गए हैं।

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यह आंदोलन Rajasthan Contractors Association संघर्ष समिति के बैनर तले किया जा रहा है, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए ठेकेदार बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। इसके साथ ही निर्माण और जल आपूर्ति से जुड़ी अन्य इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है, जिससे मामला और अधिक व्यापक होता जा रहा है।धरना स्थल पर ठेकेदारों ने सरकार से जल्द भुगतान की मांग दोहराई है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। ठेकेदारों ने सरकार को 20 अप्रैल तक का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।

आंदोलनकारी ठेकेदारों ने साफ कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक भुगतान नहीं किया गया, तो 21 अप्रैल से पूरे प्रदेश में प्रतिदिन दो घंटे पानी की आपूर्ति रोकी जाएगी। इस घोषणा ने प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर जल आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन लंबा खिंचता है तो इससे न केवल सरकारी परियोजनाओं पर असर पड़ेगा, बल्कि आम लोगों को भी पानी जैसी बुनियादी सुविधा में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। जल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवा में बाधा की स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।सरकारी स्तर पर अभी तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि बढ़ते दबाव और अल्टीमेटम को देखते हुए जल्द ही बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल यह मामला राज्य में प्रशासन और ठेकेदारों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है, और आने वाले दिनों में इसका असर प्रदेश की जल व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों पर पड़ सकता है।