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होली की तारीख को लेकर असमंजस, वीडियो में देखें ज्योतिषाचार्यों ने सुझाए भद्रारहित समय पर होलिका दहन

 

होली की तारीख को लेकर इस बार लोगों में असमंजस बना हुआ है। होलिका दहन और धुलंडी के दिन को लेकर ज्योतिषाचार्यों के बीच मतभेद हैं। इसका मुख्य कारण 3 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण और पूर्णिमा के समय भद्रा का प्रभाव माना जा रहा है।

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परंपरा के अनुसार, होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को सूर्यास्त के बाद किया जाता है। लेकिन इस बार 2 मार्च को प्रदोषकाल में भद्रा होने के कारण उस समय होलिका दहन शास्त्रसम्मत नहीं माना गया है। इसलिए ज्योतिषाचार्यों का सुझाव है कि प्रदोषकाल में होलिका दहन न किया जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण हो, तो होलिका दहन भद्रारहित समय में, चंद्रग्रहण से पूर्व रात्रि के चौथे प्रहर में किया जाना चाहिए। वहीं, यदि अगले दिन ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण हो, तो पिछले दिन भद्रा समाप्त होने के बाद रात्रि के चौथे प्रहर या भद्रा के पुच्छ भाग में होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि होलिका दहन का सही समय न केवल परंपरा का पालन करता है, बल्कि इसे करने से होली की शुभता भी बनी रहती है। इसके बाद रंगों की होली धुलंडी पर खेली जाएगी, जो आमतौर पर होलिका दहन के अगले दिन होती है।

इस साल भद्र और चंद्रग्रहण के कारण समय निर्धारण में थोड़ा जटिलता आई है, लेकिन विशेषज्ञों ने भद्रारहित और शुभ समय में होलिका दहन करने की सलाह दी है। इससे न केवल धार्मिक नियमों का पालन होगा, बल्कि होली उत्सव का आनंद भी सुरक्षित और मंगलमय रहेगा।

फिलहाल, लोग इस बार होली की तैयारी में जुटे हुए हैं और ज्योतिषाचार्यों के दिशानिर्देशों के अनुसार होलिका दहन और धुलंडी के कार्यक्रम तय कर रहे हैं।