राजस्थान हाईकोर्ट को 11 बार बम से उड़ाने की धमकी, फुटेज में जानें जांच एजेंसियों के लिए बनी चुनौती
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर बेंच को अक्टूबर 2025 से अब तक 11 बार बम की धमकियां मिल चुकी हैं। लगातार मिल रही इन धमकियों के कारण अदालत की कार्यवाही लगभग 14 घंटे तक प्रभावित हुई है। हर बार सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट जारी करना पड़ा, परिसर खाली करवाया गया और गहन तलाशी अभियान चलाया गया।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि बार-बार कोशिशों के बावजूद राज्य की जांच एजेंसियां अब तक धमकी देने वालों तक नहीं पहुंच सकी हैं। मामले की जांच में राजस्थान पुलिस की विभिन्न इकाइयां—एटीएस, आईबी, साइबर सेल और इंटेलीजेंस विंग—लगातार जुटी हुई हैं, लेकिन तकनीकी जटिलताओं के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, धमकी भरे ईमेल मल्टी वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) के जरिए भेजे जा रहे हैं। ऐसे में वास्तविक लोकेशन और भेजने वाले की पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है। ईमेल ट्रैक करने के लिए भारतीय एजेंसियों को विदेशी सर्वर प्रोवाइडर्स से डेटा मांगना पड़ता है, जिसकी प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होती है। अंतरराष्ट्रीय कानूनी औपचारिकताओं और अनुमति प्रक्रियाओं के कारण कई बार महीनों लग जाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि राज्य स्तर की एजेंसियों की तुलना में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के लिए विदेश से डेटा मंगवाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है। एनआईए के पास अंतरराष्ट्रीय समन्वय के लिए अधिक अधिकार और स्थापित तंत्र मौजूद है। यदि इन सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंपी जाती है, तो संभावना जताई जा रही है कि कुछ महीनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि बार-बार धमकी भरे मेल कौन भेज रहा है और उसका मकसद क्या है।
बार-बार मिल रही धमकियों से न केवल न्यायिक कार्य बाधित हो रहा है, बल्कि न्यायालय परिसर में कार्यरत न्यायाधीशों, वकीलों और आम नागरिकों में भी चिंता का माहौल है। हर बार बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और पुलिस बल को तैनात करना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही आरोपियों तक नहीं पहुंचा गया तो इस तरह की धमकियां भविष्य में भी जारी रह सकती हैं। वहीं सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है और हर पहलू से जांच की जा रही है।
फिलहाल, हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त जांच और निगरानी बढ़ाई गई है। राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि इस गंभीर मामले का जल्द समाधान निकल सके।