प्रदेश में गिग वर्कर्स को बड़ी राहत, वीडियो में जानें परिवहन विभाग ने लागू की एग्रीगेटर पॉलिसी, कैब कंपनियों पर लागू होंगे सख्त नियम
प्रदेश में गिग वर्कर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने एग्रीगेटर पॉलिसी को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इस पॉलिसी के लागू होने के बाद अब राज्य में काम कर रही कैब एग्रीगेटर कंपनियों को तय नियमों और शर्तों के तहत ही संचालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उनका लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकेगा।
परिवहन विभाग ने करीब 10 दिन पहले एग्रीगेटर पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी कर आम जनता, गिग वर्कर्स और संबंधित हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद विभाग ने गुरुवार को संयुक्त शासन सचिव एवं अतिरिक्त आयुक्त परिवहन ओपी बुनकर के हस्ताक्षर से पॉलिसी की अधिसूचना जारी कर दी। नोटिफिकेशन जारी होते ही पॉलिसी पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गई है।
नई एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत अब कैब सेवाओं का किराया सरकार द्वारा तय किया जाएगा। इससे मनमाने किराए और पीक टाइम में अत्यधिक शुल्क वसूलने पर रोक लगेगी। पॉलिसी के अनुसार तय किराए का 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे वाहन मालिक या ड्राइवर को मिलेगा, जबकि शेष राशि एग्रीगेटर कंपनी के हिस्से में जाएगी। इससे गिग वर्कर्स की आय में स्थिरता आने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
पॉलिसी में यात्रा रद्द करने को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई यात्रा बिना उचित कारण के रद्द की जाती है, तो ड्राइवर या यात्री पर अधिकतम 100 रुपये तक की पेनल्टी लगाई जा सकेगी। इससे अनावश्यक कैंसिलेशन पर अंकुश लगेगा और ड्राइवरों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
इसके अलावा, एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना लाइसेंस के कैब सेवा चलाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पहले जुर्माना लगाया जाएगा और गंभीर या बार-बार उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान भी रखा गया है। इससे कंपनियों की जवाबदेही तय होगी और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
परिवहन विभाग का मानना है कि यह पॉलिसी गिग वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा करने और यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और सस्ती सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लंबे समय से गिग वर्कर्स द्वारा किराए, कमीशन और कैंसिलेशन से जुड़ी समस्याओं को लेकर मांग उठाई जा रही थी, जिसे अब इस पॉलिसी के जरिए संबोधित किया गया है।
पॉलिसी लागू होने के बाद प्रदेश में कैब सेवाओं के संचालन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल ड्राइवरों को फायदा होगा, बल्कि यात्रियों को भी तय और पारदर्शी किराए का लाभ मिलेगा। आने वाले समय में परिवहन विभाग पॉलिसी के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर इसमें संशोधन भी किया जा सकता है।