PTI भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, दो मिनट के वीडियो में देंखे डमी कैंडिडेट और फर्जी मार्कशीट से हासिल की सरकारी नौकरी
सरकारी नौकरी पाने की चाहत में नियमों और कानून को रौंदने का एक बड़ा मामला सामने आया है। शारीरिक शिक्षा अध्यापक (PTI) सीधी भर्ती-2022 में दो युवकों ने सुनियोजित तरीके से न सिर्फ फर्जीवाड़ा किया, बल्कि डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास कर सरकारी शिक्षक की कुर्सी तक पहुंच गए। अब इस हाई-प्रोफाइल घोटाले का खुलासा होने के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है।
जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान बैक डेट की फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल किया। नियमों के मुताबिक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और तारीखों को पूरा न करने के बावजूद, उन्होंने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आवेदन किया। यही नहीं, लिखित परीक्षा के दौरान खुद की जगह डमी कैंडिडेट को बैठाकर परीक्षा पास कर ली। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन के समय फर्जी मार्कशीट लगाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली गई।
एसओजी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल दो युवकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिन यूनिवर्सिटीज से बैक डेट में मार्कशीट जारी की गई, वे भी संदेह के घेरे में हैं। इस मामले में रविन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी, भोपाल और श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस, भोपाल के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
बताया जा रहा है कि दोनों यूनिवर्सिटीज से नियमों को दरकिनार कर बैक डेट में मार्कशीट जारी की गई, जिससे आरोपियों को पात्रता साबित करने में मदद मिली। एसओजी अब यह जांच कर रही है कि क्या इन यूनिवर्सिटीज के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा हुआ या फिर दस्तावेज पूरी तरह नकली थे।
इस मामले के सामने आने के बाद राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस तरह का मामला सिस्टम में गहरी सेंध का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस फर्जीवाड़े का खुलासा नहीं होता, तो योग्य उम्मीदवारों के हक पर डाका पड़ता रहता।
एसओजी का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। यह भी जांच की जा रही है कि इसी भर्ती परीक्षा में और कितने अभ्यर्थियों ने डमी कैंडिडेट या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
फिलहाल, दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया है। एसओजी ने साफ किया है कि इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सरकारी नौकरी की दौड़ में कुछ लोग किस हद तक जाकर कानून को ठेंगा दिखाने से भी नहीं चूकते।