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जयपुर के भांकरोटा में जमीन विवाद गहराया, निजी रियल एस्टेट कंपनी ने किसानों पर लगाया कब्जे का आरोप

 

राजधानी जयपुर के भांकरोटा क्षेत्र में जमीन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। एक निजी रियल एस्टेट कंपनी ने कुछ स्थानीय किसानों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि किसानों ने कंपनी की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में गलत तरीके से अपने नाम दर्ज करवा लिया है और जमीन के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा भी कर लिया है। इस शिकायत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और मामला अब प्रशासनिक व कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।

कंपनी का कहना है कि उसने भांकरोटा इलाके में बड़े स्तर पर जमीन खरीदकर आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित करने की योजना बनाई थी। इसके लिए जमीन की विधिवत रजिस्ट्री और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी पूरी की गई थीं। लेकिन हाल ही में जब कंपनी ने साइट पर काम शुरू करने की कोशिश की, तो पता चला कि जमीन के कुछ हिस्सों का राजस्व रिकॉर्ड बदलकर स्थानीय किसानों के नाम दर्ज कर दिया गया है।

कंपनी के अधिकारियों का आरोप है कि किसानों ने कथित रूप से गलत दस्तावेजों और फर्जी एंट्री के जरिए यह बदलाव कराया है। साथ ही, जमीन पर अस्थायी निर्माण और खेती कर कब्जा जमा लिया गया है, जिससे कंपनी की परियोजना प्रभावित हो रही है। कंपनी ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मामले को लेकर कंपनी ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। राजस्व विभाग से रिकॉर्ड मंगवाकर दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन का असली मालिक कौन है और रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुआ।

वहीं दूसरी ओर, स्थानीय किसानों का कहना है कि जमीन पर उनका वर्षों पुराना कब्जा और उपयोग रहा है। उनका दावा है कि उन्होंने किसी भी तरह की अवैध एंट्री नहीं कराई है और वे अपने अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कंपनी दबाव बनाकर जमीन पर कब्जा करना चाहती है।

इस विवाद ने स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। ग्रामीणों और कंपनी प्रतिनिधियों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

भूमि विशेषज्ञों का कहना है कि जयपुर और आसपास के इलाकों में तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट विकास के चलते जमीन विवादों के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और समय पर सत्यापन बेहद जरूरी है।