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डूंगरपुर में बारिश के लिए निभाई गई अनोखी 'धाड़' परंपरा, वीडियो में जाने पुरुषों का वेश धारण कर महिलाओं ने निकाला जुलूस

 

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में अच्छी बारिश की कामना को लेकर सदियों पुरानी लोक परंपरा 'धाड़' एक बार फिर पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई गई। जिले के मोरा सारण, डूंगरवाड़ा, कुआं सहित आसपास के कई गांवों में महिलाओं ने पुरुषों का वेश धारण कर गांव की गलियों में पारंपरिक जुलूस निकाला और इंद्रदेव से अच्छी वर्षा की प्रार्थना की। ग्रामीण संस्कृति और लोक आस्था से जुड़ी इस अनूठी परंपरा ने एक बार फिर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। जुलूस में बड़ी संख्या में ग्रामीण भी शामिल हुए और पूरे गांव में धार्मिक एवं सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला।

पुरुषों के वेश में नजर आईं महिलाएं

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'धाड़' परंपरा के तहत महिलाओं ने सफेद धोती-कुर्ता, सिर पर रंग-बिरंगा साफा बांधा और हाथों में लाठी, तलवार तथा कृषि उपकरण लेकर पारंपरिक अंदाज में गांव की गलियों का भ्रमण किया।इस दौरान महिलाएं भजन-कीर्तन और पारंपरिक लोकगीत गाते हुए आगे बढ़ीं। पूरे गांव में गूंजते लोकगीतों और इंद्रदेव से वर्षा की प्रार्थना ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।

अच्छी बारिश के लिए की गई विशेष प्रार्थना

जुलूस के दौरान महिलाओं ने खेतों में भरपूर पानी, अच्छी फसल और किसानों की समृद्धि की कामना की। ग्रामीणों का मानना है कि इस लोक अनुष्ठान के माध्यम से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है।वर्षा की कमी वाले वर्षों में इस परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है और पूरे गांव के लोग इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।

पीढ़ियों से चली आ रही है 'धाड़' की परंपरा

ग्रामीणों के अनुसार, 'धाड़' केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।स्थानीय मान्यता है कि जब मानसून कमजोर पड़ता है या अपेक्षा से कम बारिश होती है, तब महिलाएं पुरुषों का रूप धारण कर गांव में जुलूस निकालती हैं। इस अनूठी परंपरा के जरिए इंद्रदेव से अच्छी वर्षा की प्रार्थना की जाती है।

लोक संस्कृति की जीवंत मिसाल बनी परंपरा

आधुनिक दौर में भी डूंगरपुर के ग्रामीण अपनी सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को पूरी आस्था के साथ संजोए हुए हैं। 'धाड़' जैसी परंपराएं न केवल प्रकृति के प्रति लोगों के विश्वास को दर्शाती हैं, बल्कि समाज में एकता, सामूहिक सहभागिता और लोक संस्कृति को जीवित रखने का भी संदेश देती हैं।ग्रामीणों का कहना है कि बदलते समय के बावजूद वे अपनी इस अनमोल परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाते रहेंगे, ताकि लोक संस्कृति और आस्था की यह विरासत हमेशा जीवित रहे।