धौलपुर में पितृ पक्ष की शुरुआत, मचकुंड पर पूर्वजों के तर्पण के लिए उमड़े श्रद्धालु; वीडियो में जाने मंत्रोच्चार के बीच किया तर्पण
धौलपुर में पितृ पक्ष की शुरुआत शनिवार से तीर्थराज मचकुंड पर हुई। पितरों को श्रद्धांजलि देने और उनकी आत्मशांति के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मचकुंड पहुंचे। यहां पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अपने पूर्वजों को जल अर्पित कर तर्पण किया। लोगों ने अपने पितरों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी किए।
पितृ पक्ष के पहले दिन मचकुंड पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में स्नान करने के बाद अपने पूर्वजों का स्मरण किया और विधि-विधान से तर्पण किया। इस दौरान मंदिर परिसर और मचकुंड क्षेत्र में पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही।तीर्थराज मचकुंड को धौलपुर का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान यहां तर्पण और श्राद्ध करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। आने वाले दिनों में भी मचकुंड पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। लोग अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और अन्य धार्मिक कर्मकांड करेंगे।
मचकुंड के महंत कृष्णदास ने बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान हिंदू परिवारों में मांगलिक कार्यक्रम आम तौर पर नहीं किए जाते हैं। इस अवधि में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी आत्मसंतुष्टि के लिए तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध और तर्पण से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार की परेशानियां दूर होने की कामना की जाती है।शास्त्रों में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक कर्म करने की अवधि बताया गया है। मान्यता के अनुसार इस दौरान पितरों का विशेष रूप से स्मरण किया जाता है। परिवार के लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार तर्पण, श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन और धार्मिक पाठ जैसे कार्य करते हैं।
पितृ पक्ष की अंतिम तिथि पर पितरों को तर्पण करने के बाद ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जाती है। इस दौरान जल तर्पण के साथ ब्राह्मणों को भोजन कराने और गीता का पाठ करने का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।धौलपुर के मचकुंड पर शुरू हुए पितृ पक्ष के आयोजन के साथ ही अब पूरे पखवाड़े श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनकी आत्मशांति की प्रार्थना करेंगे और धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्राद्ध कर्म संपन्न करेंगे।