धौलपुर के भारत हॉस्पिटल में लात, घूंसे, थप्पड़ से डॉक्टर की पिटाई, परिजनों ने मारने के लिए हेलमेट-कुर्सी उठाई
बबीता के घर में खुशियों की किलकारियां गूंजी ही थीं कि अचानक सब कुछ थम गया। जयपुर से आई एक बुरी खबर ने धौलपुर के भारत हॉस्पिटल में अफरा-तफरी मचा दी। मरीज के परिजनों का गुस्सा इतना भड़क गया कि उन्होंने कानून हाथ में लेने की कोशिश की और अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार, बबीता की स्थिति में अचानक गंभीर बदलाव आया और अस्पताल से जयपुर से रिपोर्ट या जानकारी आने के बाद परिजन सकते में आ गए। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने स्थिति को काबू में करने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए परिजन किसी भी तरह से शांत होने को तैयार नहीं थे।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि परिजन अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों पर नाराजगी जताते हुए गंभीर शब्दों का प्रयोग कर रहे थे। कुछ परिजनों ने तो सुरक्षा कर्मियों से भिड़ने की भी कोशिश की। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी संबंधित पक्षों से बयान लिए जा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने भी बयान जारी कर कहा कि मरीज की देखभाल पूरी तरह से नियमों और मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार की गई। उन्होंने परिजनों से अपील की कि वह कानून का सहारा लें और किसी तरह की हिंसक कार्रवाई से बचें।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं अस्पतालों में आम तौर पर तब होती हैं जब मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाती है और परिवार वाले भावनाओं में बह जाते हैं। ऐसे समय में परिवार को संवेदनशील तरीके से सूचना देना और प्रशासन का शांतिपूर्ण नियंत्रण आवश्यक होता है।
स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसी जगह पर यह घटना गंभीर है क्योंकि इससे न केवल स्टाफ की सुरक्षा पर असर पड़ता है बल्कि अन्य मरीजों और उनके परिवार वालों की मानसिक शांति भी प्रभावित होती है।
धौलपुर के भारत हॉस्पिटल में हुई इस घटना ने यह सवाल भी उठाया है कि आपातकालीन मेडिकल परिस्थितियों में परिवारों को कैसे सही तरीके से सूचित किया जाए ताकि पैनिक और हंगामा टाला जा सके। कई विशेषज्ञ अब इस दिशा में नई गाइडलाइन बनाने की भी सलाह दे रहे हैं।
अंततः, अस्पताल प्रशासन और पुलिस के संयुक्त प्रयासों के बाद स्थिति को काबू में लाया गया और हंगामे को शांत कराया गया। अब सभी की निगाहें मामले की पूरी जांच और इसके परिणामों पर लगी हुई हैं। परिजन और स्थानीय नागरिक इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि जांच में दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।