दौसा में ऑपरेशन सिंदूर के समर्थन में ब्लड डोनेशन कैंप, वीडियो में जानें नर्सिंगकर्मियों ने आयोजित किया रक्तदान शिविर
आतंकवाद के खिलाफ भारत के चल रहे ऑपरेशन सिंदूर में तैनात सेना के जवानों का मनोबल बढ़ाने और मानवता का संदेश देने के उद्देश्य से दौसा जिला अस्पताल के नर्सिंगकर्मियों ने एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की। अस्पताल परिसर में रविवार को एक विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस शिविर का आयोजन जिला अस्पताल की ब्लड बैंक यूनिट में किया गया, जहां नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल कर्मियों और आस-पास के गांवों के युवाओं ने देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर रक्तदान किया। शिविर में भाग लेने वाले अधिकतर लोगों ने इसे “सीमा पर खड़े जवानों के लिए एक छोटी सी सेवा” बताया और कहा कि जब देश की सेना अपने प्राणों की आहुति देकर हमारी सुरक्षा कर रही है, तो हम भी अपने स्तर पर उनके लिए कुछ करना चाहते हैं।
शिविर में कुल मिलाकर 100 से अधिक यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जिसे ज़रूरतमंद मरीजों और आपात स्थिति में काम आने के लिए ब्लड बैंक में सुरक्षित किया गया है। खास बात यह रही कि शिविर में युवाओं का उत्साह देखने लायक था। कई युवा पहली बार रक्तदान करने आए थे और उन्होंने कहा कि वे इस पहल को आगे भी जारी रखेंगे।
नर्सिंग स्टाफ के एक प्रतिनिधि ने बताया, “हम सभी देश के जवानों को सलाम करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के तहत जिस तरह से हमारी सेना आतंक के खिलाफ लड़ रही है, वह गर्व की बात है। हमारा यह रक्तदान एक प्रतीकात्मक समर्थन है, जो दर्शाता है कि देश की जनता भी सेना के साथ खड़ी है।”
इस मौके पर अस्पताल प्रशासन और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी शिविर का निरीक्षण किया और रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया। प्रशासन ने नर्सिंगकर्मियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा।
ग्रामीण युवाओं की भागीदारी भी इस शिविर की खासियत रही। आसपास के गांवों से आए कई युवाओं ने कहा कि वे सोशल मीडिया और समाचारों के जरिए ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जान रहे हैं और सेना के योगदान को सम्मान देने के लिए इस रक्तदान शिविर का हिस्सा बने हैं।
यह शिविर यह संदेश देता है कि देश की सुरक्षा सिर्फ सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की नैतिक जिम्मेदारी भी है। दौसा के इस प्रयास ने न केवल जवानों के प्रति सम्मान प्रकट किया, बल्कि एकजुटता और सेवा भावना की मिसाल भी पेश की।