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बेंगलुरु में गुरुकुल संचालित करेगा मेहंदीपुर बालाजी ट्रस्ट, वीडियो में देखें श्रीश्री रविशंकर ने किया शिलान्यास

 

सनातन संस्कृति और वेदों के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दौसा के प्रसिद्ध मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ट्रस्ट द्वारा रामेष्ठ वेद-संस्कृत महाविद्यालय की नींव रखी गई। यह शिलान्यास समारोह बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में आयोजित किया गया, जहां महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर की उपस्थिति में यह पावन कार्य संपन्न हुआ।

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इस मौके पर आध्यात्मिक वातावरण में मंत्रोच्चारण, यज्ञ और वैदिक परंपराओं के अनुसार विधिविधान से शिलान्यास किया गया। आयोजन में देशभर से आए वेदाचार्य, विद्वान, श्रद्धालु और भक्तों की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बना दिया।

वैदिक शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि रामेष्ठ वेद-संस्कृत महाविद्यालय का उद्देश्य प्राचीन वेदों, संस्कृत भाषा और भारतीय परंपराओं को संरक्षित करना और युवा पीढ़ी को वैदिक ज्ञान की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने बताया कि इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, आवास एवं भोजन की सुविधा दी जाएगी, साथ ही आधुनिक शिक्षा के साथ वैदिक अध्ययन का समन्वय भी किया जाएगा।

श्रीश्री रविशंकर ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "वेद केवल धर्म ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शैली हैं। इस प्रकार के संस्थान भविष्य की पीढ़ियों को मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाएंगे।" उन्होंने कहा कि यह महाविद्यालय भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पुनः स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

बालाजी ट्रस्ट की राष्ट्रसेवा

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ट्रस्ट धार्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र होने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। ट्रस्ट द्वारा देशभर में कई धर्मशालाएं, संस्कृत विद्यालय, और चिकित्सा शिविरों का संचालन किया जा रहा है। रामेष्ठ वेद-संस्कृत महाविद्यालय इस सेवा यात्रा की एक नई कड़ी है।

स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा

इस शिलान्यास समारोह को लेकर आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कर्नाटक और राजस्थान के कई धार्मिक संगठनों ने इस पहल की प्रशंसा की और इसे सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना की दिशा में एक प्रभावशाली कदम बताया।