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दौसा में फर्जी सिलिकोसिस सर्टिफिकेट घोटाला, दो डॉक्टर और एक रेडियोग्राफर गिरफ्तार, पुलिस जांच तेज

 

राजस्थान के दौसा जिले में फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी करने के एक बड़े मामले का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में दो डॉक्टरों और एक रेडियोग्राफर को गिरफ्तार किया गया है। मामला लंबे समय से जांच के दायरे में था, जो अब एक संगठित फर्जीवाड़े के रूप में सामने आया है।गिरफ्तार आरोपियों में डॉक्टर मनोज ऊंचवाल, डॉक्टर डीएन शर्मा और रेडियोग्राफर मनोहर लाल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन पर आरोप है कि इन्होंने गलत तरीके से सिलिकोसिस से जुड़े मेडिकल प्रमाण पत्र जारी किए, जिससे सरकारी योजनाओं और मुआवजा प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया गया।

2024 में दर्ज हुआ था मामला

यह मामला सबसे पहले वर्ष 2024 में Kotwali Police Station Dausa में दर्ज किया गया था। शिकायत मिलने के बाद से ही पुलिस इसकी गहन जांच कर रही थी, लेकिन अब तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर बड़ी कार्रवाई की गई है।

साइबर सेल की मदद से खुला राज

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में Cyber Cell Rajasthan Police की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की तकनीकी जांच की, जिसके बाद इस फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।जांच में यह भी सामने आया है कि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और इसमें कई स्तरों पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

पूछताछ जारी, और गिरफ्तारियां संभव

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह मामला सिर्फ कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता।

सिलिकोसिस सर्टिफिकेट का दुरुपयोग

सिलिकोसिस एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी है, जो मुख्य रूप से धूल और खनन क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को प्रभावित करती है। इस बीमारी के प्रमाण पत्र के आधार पर सरकार की ओर से मुआवजा और सहायता योजनाएं चलाई जाती हैं। ऐसे में फर्जी प्रमाण पत्र जारी होना न केवल सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग है, बल्कि वास्तविक मरीजों के अधिकारों पर भी असर डालता है।