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चित्तौड़गढ़ में वन्यजीव गणना शुरू, वीडियो में जाने बस्सी और सीतामाता सेंचुरी में घट-बढ़ के मिले संकेत

 

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में 1 मई की शाम 5 बजे से वन्यजीव गणना शुरू हो रही है। यह गणना बस्सी वन्यजीव अभयारण्य और सीतामाता वाइल्डलाइफ सेंचुरी में की जाएगी। वन विभाग की यह प्रक्रिया हर साल की तरह इस बार भी जैव विविधता और वन्यजीवों की स्थिति का आकलन करने के लिए की जा रही है।पिछले वर्ष यानी 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों सेंचुरियों में वन्यजीवों की संख्या में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कुछ प्रजातियों में कमी दर्ज की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में नए पक्षियों और जीवों की उपस्थिति भी देखी गई है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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सीतामाता सेंचुरी की सबसे खास पहचान मानी जाने वाली उड़न गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरेल) की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में इनकी संख्या 100 थी, जो 2025 में घटकर 85 रह गई। वन विभाग के अनुसार, यह गिरावट पर्यावरणीय बदलाव या आवासीय दबाव का परिणाम हो सकती है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।वहीं तेंदुए (लेपर्ड) की संख्या को लेकर दोनों सेंचुरियों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं। बस्सी सेंचुरी में लेपर्ड की संख्या में कमी आई है, जबकि सीतामाता सेंचुरी में उनकी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवास की स्थिति पर निर्भर मानी जा रही है।

कुल वन्यजीवों की संख्या पर नजर डालें तो बस्सी सेंचुरी में 2024 में 3667 वन्यजीव दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 3661 रह गई है। यानी कुल मिलाकर 6 वन्यजीवों की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव गणना के दौरान प्राप्त होने वाले ताजा आंकड़े संरक्षण योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसके आधार पर यह तय किया जाता है कि किन क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बदलते मौसम, मानव हस्तक्षेप और आवासीय दबाव का सीधा असर वन्यजीवों की संख्या पर पड़ रहा है। हालांकि, नए पक्षियों और कुछ प्रजातियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि वन क्षेत्र में अभी भी जैव विविधता बनी हुई है। फिलहाल, वन विभाग की टीम गणना कार्य में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिससे वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।