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मध्य-पूर्व तनाव का असर, वीडियो में देंखे राजस्थान के मार्बल-टेक्सटाइल उद्योग संकट में, लाखों मजदूर प्रभावित

 

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अब United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर राजस्थान के उद्योगों पर पड़ रहा है। रेड सी और Strait of Hormuz में सप्लाई चेन बाधित होने से प्रदेश के मार्बल, ग्रेनाइट और टेक्सटाइल सेक्टर में संकट गहराता जा रहा है।

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उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में अस्थिरता के कारण माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका नतीजा यह है कि Mundra Port पर कंटेनर बड़ी संख्या में अटके पड़े हैं। शिपिंग चार्ज में भी 5 से 6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे निर्यातकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इस संकट का सबसे बड़ा असर श्रमिकों पर देखने को मिल रहा है। अनुमान के अनुसार, करीब 2 लाख मजदूरों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उद्योगों में उत्पादन घटने के कारण काम के घंटे कम किए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

Chittorgarh में मार्बल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां उत्पादन करीब 50 प्रतिशत तक गिर गया है। जो यूनिट्स पहले 24 घंटे चलती थीं, वे अब केवल 12 घंटे ही संचालित हो रही हैं। इससे उत्पादन क्षमता और राजस्व दोनों में गिरावट आई है।

वहीं, Jalore में ग्रेनाइट उद्योग की स्थिति और भी गंभीर है। यहां करीब 50 प्रतिशत इकाइयां बंद हो चुकी हैं। उत्पादन 13 लाख वर्ग फीट से घटकर मात्र 4.55 लाख वर्ग फीट रह गया है, जो उद्योग के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

Bhilwara का टेक्सटाइल सेक्टर भी इस संकट से अछूता नहीं है। यहां 800 से 1000 करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट ऑर्डर अटके हुए हैं। इसके अलावा उत्पादन लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उद्योगपतियों की चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए, तो इसका असर और गहरा हो सकता है। उद्योगों में छंटनी की स्थिति भी पैदा हो सकती है, जिससे बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है।

फिलहाल, राज्य के उद्योगपति सरकार से राहत और सहायता की मांग कर रहे हैं, ताकि इस संकट से उबरने में मदद मिल सके। आने वाले समय में वैश्विक हालात और उनके प्रभाव पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।