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चित्तौड़गढ़ में तस्करों ने बदला तरीका, पुलिस दबाव के बीच अब नए ठिकानों में छिपा रहे अवैध माल

 

चित्तौड़गढ़ जिले में तस्करों के हौसले अब भी बुलंद नजर आ रहे हैं। फिल्म पुष्पा का चर्चित डायलॉग “झुकेगा नहीं…” मानो तस्करों ने अपनी कार्यशैली का हिस्सा बना लिया हो। हालांकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की लगातार सख्ती के बाद अब तस्करों ने अपने तरीके पूरी तरह बदल दिए हैं। पहले जहां खुलेआम अवैध कारोबार संचालित होता था, वहीं अब पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते तस्कर नए और गुप्त ठिकानों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिले में अवैध मादक पदार्थ, डोडा-चूरा और अन्य तस्करी के मामलों में लगातार कार्रवाई होने के बाद तस्करों ने माल छिपाने और सप्लाई करने के नए रास्ते तलाश लिए हैं। पुलिस की नजर से बचने के लिए अब सुनसान इलाकों, खेतों, बंद गोदामों और ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थायी ठिकाने बनाए जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि तस्कर अब छोटे-छोटे नेटवर्क बनाकर काम कर रहे हैं ताकि एक साथ बड़ी खेप पकड़े जाने का खतरा कम हो। कई मामलों में तस्करी का माल निजी वाहनों, कृषि उपकरणों और रोजमर्रा के सामान के बीच छिपाकर ले जाया जा रहा है। पुलिस को भ्रमित करने के लिए लगातार रूट और समय भी बदले जा रहे हैं।

हाल के महीनों में चित्तौड़गढ़ पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियों ने कई बड़ी कार्रवाइयों को अंजाम दिया है। बड़ी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं और कई तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई के दबाव में तस्करों ने भले ही तरीके बदल लिए हों, लेकिन वे कानून की पकड़ से ज्यादा समय तक बच नहीं पाएंगे।

पुलिस अब तकनीकी निगरानी, मुखबिर तंत्र और विशेष टीमों के जरिए तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हुई है। जिले के संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी बढ़ाई गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तस्करी के कारण युवाओं में नशे की समस्या बढ़ रही है, इसलिए प्रशासन को और सख्त कदम उठाने चाहिए। वहीं पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में तस्करों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।

चित्तौड़गढ़ में बदलते तस्करी के तौर-तरीकों ने पुलिस के सामने नई चुनौती जरूर खड़ी कर दी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां भी अब उसी तेजी से अपने ऑपरेशन और रणनीति को अपडेट करती नजर आ रही हैं।