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Buxar रबी फसलों में झुलसा रोग की करें निगरानी: कृषि वैज्ञानिक

 

बिहार न्यूज़ डेस्क पिछले कुछ दिनों से हो रही कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन के साथ खेती किसानी भी प्रभावित हो रही है.खासकर खेतों में लगी विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती इससे प्रभावित हो रही है.पूसा स्थित कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए समसामयिक सुझाव जारी किया है।

इसके तहत आलू, मटर, टमाटर, धनियाँ, लहसून एवं अन्य रबी फसलों में कृषक भाई झुलसा रोग की निगरानी करें.बदलीनुमा मौसम तथा वातावरण में नमी होने पर यह बीमारी फसलों में काफी तेजी से फैलती है.इस रोग में फसलों की पत्तियों के किनारे व सिरे से झुलसना प्रारंभ होती है जिसके कारण पूरा पौधा झुलस जाता है.इस रोग के लक्षण दिखने पर 2.5 ग्राम डाई-इथेन एम 45 फफूंदनाशक दवा का प्रति लीटर पानी की दर से घोल बना कर समान रुप से फसल पर 2-3 छिड़काव 10 दिनों के अन्तराल पर करें.मटर की फसल में चूर्णिल फफूंदी (पाउडरी मिल्लयु) रोग की निगरानी करें, जिसमें पत्तियों, फलों एवं तनों पर सफेद चूर्ण दिखाई पड़ती है.इस रोग से बचाव के लिए फसल में कैराथेन दवा अथवा सल्फैवस दवा का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।प्याज का पौध जो कि 50-55 दिनों का हो गया हो, तैयार क्यारी में पंक्ति से पंक्ति की दुरी 15 सेंटीमीटर, पौध से पौध की दूरी 10 सेंटीमीटर पर रोपाई करें.पीव की रोपाई अधिक गहराई में नहीं करें।

रोपाई के 10-15 दिनों पूर्व 15-20 टन गोबर की खाद डालें.खेत की ऑनाम जुताई में 60 किली ग्राम नेत्रजन, 80 किलो ग्राम फॉस्फोरस, 80 किलो ग्राम पोटास तथा 40 किलो ग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर का व्यवहार करें.बैगन की फसल को तना एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित तना एवं फलो को इकट्ठा कर नष्ट कर दें.यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड 49 ईसी प्रति एक एमएल प्रति चार लीटर पानी की दर से छिड़काव करे।

सब्जियों में निकाई-गुड़ाई करें.बैगन की फसल को तना एवं फल छेदक कीट की निगरानी करें.फसल में कीट का प्रकोप दिखने पर रोकथाम हेतु सर्वप्रथम ग्रसित तना एवं फलों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें तथा फसल में स्पिनोसेड 49 ई०सी०/1 एमएल प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिडकाव करें.कीटनाशक दवा के तैयार पोल में गोद एक एमएल प्रति लीटर पानी की दर से अवश्य मिलावे।

 

 

बक्सर न्यूज़ डेस्क