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बीकानेर के कोलायत में मंत्री सुमित गोदारा की जनसुनवाई में हंगामा, वीडियो में जाने विधायक को नहीं बुलाने पर नाराज हुए भाजपा कार्यकर्ता

 

राजस्थान के बीकानेर जिले के कोलायत में मंगलवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा की जनसुनवाई के दौरान जमकर हंगामा हो गया। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक अंशुमान सिंह भाटी को नहीं बुलाने और पोस्टर में उनकी तस्वीर नहीं होने से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी।हालात बिगड़ते देख मंत्री सुमित गोदारा ने मंच से कार्यकर्ताओं को शांत कराया और इसे अपनी ओर से हुई गलती बताते हुए भविष्य में विधायक को साथ लेकर कार्यक्रम करने का आश्वासन दिया।

पंचायत भवन में आयोजित हुआ था कार्यक्रम

जानकारी के अनुसार, कोलायत पंचायत भवन में मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे लाभार्थी सम्मेलन और जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा लोगों की समस्याएं सुन रहे थे और अधिकारियों से समाधान को लेकर चर्चा कर रहे थे।इसी दौरान कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर आपत्ति जताई।

विधायक को नहीं बुलाने पर भड़के कार्यकर्ता

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कार्यकर्ताओं का आरोप था कि कार्यक्रम के पोस्टर में स्थानीय विधायक अंशुमान सिंह भाटी की तस्वीर नहीं लगाई गई और उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित भी नहीं किया गया। इसे लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई।इसके बाद कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने 'देवी सिंह भाटी जिंदाबाद' और 'अंशुमान सिंह भाटी जिंदाबाद' के नारे लगाए। देखते ही देखते कार्यक्रम स्थल पर माहौल गरमा गया।

मंत्री ने मानी गलती, दिया भरोसा

विरोध बढ़ता देख मंत्री सुमित गोदारा ने नाराज कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद मंत्री मंच पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।उन्होंने कहा कि विधायक का कार्यक्रम में शामिल नहीं होना एक गलती है। सरकारी कार्यक्रमों में कई बार छोटी-मोटी व्यवस्थागत गलतियां हो जाती हैं, लेकिन आगे से इस तरह की स्थिति नहीं बनेगी।मंत्री ने कहा कि भविष्य में जब भी कोई कार्यक्रम आयोजित होगा, उसमें स्थानीय विधायक को साथ रखकर ही आयोजन किया जाएगा।

भाजपा में अंदरूनी समन्वय पर उठे सवाल

इस घटना के बाद भाजपा के भीतर संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय विधायक को सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं किए जाने से कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई।हालांकि, मंत्री के आश्वासन के बाद मामला शांत हो गया। कार्यक्रम आगे जारी रहा और जनसुनवाई में लोगों की समस्याएं सुनी गईं।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, सत्ता पक्ष के नेताओं के कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं। कोलायत की घटना ने एक बार फिर संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को उजागर किया है।