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‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ फिर तेज, संतों ने सरकार का प्रस्ताव ठुकराया, वीडियो में देंखे मुकाम मेले से पहले लाखों के जुटान की चेतावनी

 

राजस्थान के बीकानेर में चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पर्यावरण प्रेमी रामगोपाल बिश्नोई ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार की ओर से आए प्रस्ताव को संत समाज ने सिरे से खारिज कर दिया है और आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुकाम मेले से पहले लाखों लोगों का जनसैलाब बीकानेर पहुंचेगा।

रामगोपाल बिश्नोई ने बताया कि सरकार से वार्ता के लिए संतों के एक प्रतिनिधिमंडल को जयपुर भेजा गया था। वहां संभागीय आयुक्त के माध्यम से एक आदेश जारी करने की बात कही गई। लेकिन संतों ने वापस लौटकर उस आदेश को नाकाफी बताते हुए अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक किसी भी आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

बिश्नोई ने कहा कि आंदोलन के बावजूद बीकानेर और आसपास के इलाकों में खेजड़ी के पेड़ लगातार काटे जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रेमियों में गहरा रोष है। उन्होंने सवाल उठाया, “जब कटाई रुक ही नहीं रही है तो हम सरकार की गंभीरता पर कैसे भरोसा करें?”

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उन्होंने आगे कहा कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीय पारिस्थितिकी की जीवनरेखा है। यह पशुओं के चारे, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम है। ऐसे में इसकी अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है, जमीनी स्तर पर कोई सख्ती नजर नहीं आ रही। यही वजह है कि लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बिश्नोई ने स्पष्ट किया कि उनकी कमेटी ने निर्णय लिया है कि जब तक आंदोलन को ठोस परिणाम नहीं मिलते, तब तक धरना-प्रदर्शन और विरोध जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मुकाम मेले से पहले एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग बीकानेर पहुंचेंगे और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर आवाज बुलंद करेंगे। इस दौरान संत समाज और ग्रामीण समुदाय भी सक्रिय रूप से आंदोलन में भाग लेगा।

‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की व्यापक लड़ाई बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच क्या कदम उठाती है।