बीकानेर अस्पताल में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन खरीद जांच के दायरे में, वीडियो में देंखे 5 प्रसूताओं की किडनी फेल होने से बढ़ी चिंता
राजस्थान के बीकानेर स्थित प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल सरकारी अस्पताल में पांच प्रसूताओं की किडनी फेल होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों की आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खरीद को लेकर अब जांच शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में पिछले लगभग 8 महीनों से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की नियमित सरकारी सप्लाई बाधित है। इसके चलते अस्पताल प्रशासन को मजबूरी में यह इंजेक्शन स्थानीय फार्मास्यूटिकल कंपनियों से खरीदना पड़ रहा है।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन प्रसव के दौरान गर्भाशय संकुचन और ब्लीडिंग रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अस्पताल में हर महीने 1200 से अधिक डिलीवरी होती हैं और औसतन लगभग 3000 इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। सामान्य प्रक्रिया के तहत एक प्रसूता को डिलीवरी के दौरान 2 से 3 बार यह इंजेक्शन लगाया जाता है।अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 6 महीनों में करीब 25 हजार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बाहर से खरीदकर उपयोग किए गए हैं। इसी बीच पांच प्रसूताओं में किडनी फेल होने के मामलों के सामने आने के बाद दवा की गुणवत्ता और सप्लाई प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब इंजेक्शन की खरीद प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह देखा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाइयों की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी या नहीं और सप्लाई चेन में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव के दौरान उपयोग होने वाली दवाओं की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कमी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है, इसलिए पूरी प्रक्रिया का ऑडिट बेहद जरूरी है।फिलहाल अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही मामले की गहन जांच में जुटे हैं, जबकि प्रभावित मरीजों के परिजनों में चिंता का माहौल बना हुआ है।