बीकानेर में बड़ा जमीन घोटाला उजागर: मृत व्यक्ति बनकर पहुंचा फर्जी शख्स, वीडियो में जाने रजिस्ट्री से पहले खुली पोल; 4 के खिलाफ केस दर्ज
राजस्थान के बीकानेर जिले के खाजूवाला उप रजिस्ट्रार कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान हैरान कर देने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया। जिस व्यक्ति के नाम पर जमीन दर्ज थी और जिसकी पहले ही मौत हो चुकी थी, उसी के नाम पर एक फर्जी व्यक्ति रजिस्ट्री कराने पहुंच गया। हालांकि, मृतक के वारिसों की सतर्कता और तहसील प्रशासन की जांच के चलते बड़ा जमीन घोटाला समय रहते पकड़ लिया गया। मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रजिस्ट्री के दौरान वारिसों ने जताई आपत्ति
तहसीलदार हरीश कुमार टाक के अनुसार, 27 जुलाई को खाजूवाला उप रजिस्ट्रार कार्यालय में चक 6 बीजीएम स्थित एक जमीन की रजिस्ट्री के लिए दो बैनामे प्रस्तुत किए गए। दस्तावेजों में दानाराम पुत्र गिरधारीराम को जमीन का विक्रेता और वेदप्रकाश पुत्र सूजाराम को खरीदार बताया गया था।रजिस्ट्री की प्रक्रिया चल ही रही थी कि उसी दौरान दानाराम के परिजनों और वारिसों ने मौके पर पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि कार्यालय में मौजूद व्यक्ति असली दानाराम नहीं है, क्योंकि वास्तविक दानाराम का पहले ही निधन हो चुका है।
जांच में खुला फर्जीवाड़े का राज
वारिसों की आपत्ति के बाद तहसील प्रशासन ने तुरंत दस्तावेजों की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अधिकारियों ने पाया कि रजिस्ट्री के लिए प्रस्तुत किए गए आधार कार्ड और पैन कार्ड भी कथित तौर पर फर्जी थे।इसके बाद पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक दी गई और मामले की सूचना पुलिस को दी गई। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी पहचान बनाकर जमीन की रजिस्ट्री कराने की कोशिश की जा रही थी।
चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित साजिश में कौन-कौन शामिल था और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर रजिस्ट्री कराने तक की पूरी योजना कैसे बनाई गई।पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह के फर्जीवाड़े में किसी संगठित गिरोह का हाथ है या पहले भी इसी तरीके से जमीनों की रजिस्ट्री कराने की कोशिश की गई है।
प्रशासन की सतर्कता से टला करोड़ों की जमीन का फर्जी सौदा
यदि समय रहते मृतक के वारिस आपत्ति नहीं जताते, तो जमीन की रजिस्ट्री पूरी हो सकती थी और बड़ा भूमि घोटाला सामने आने से पहले ही अंजाम तक पहुंच जाता। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की गहन जांच और शिकायतकर्ताओं की सतर्कता के कारण यह फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सका।
भूमि रिकॉर्ड की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर जमीनों की खरीद-फरोख्त में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में डिजिटल सत्यापन और बायोमेट्रिक जांच को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।