प्रदेश के सरकारी कॉलेज होंगे हाईटेक, 153 कॉलेजों में स्मार्ट क्लास और 35 में बनेंगी आईसीटी लैब
प्रदेश के सरकारी कॉलेजों को आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य के कई महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लास रूम और आईसीटी लैब स्थापित की जाएंगी। इसके लिए कॉलेज आयुक्तालय की ओर से बजट भी जारी कर दिया गया है।
परिवर्तित बजट घोषणा 2024-25 के तहत यह योजना लागू की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश के 153 सरकारी कॉलेजों में स्मार्ट क्लास रूम बनाए जाएंगे, जबकि बीकानेर की राजकीय डूंगर कॉलेज सहित 35 सरकारी महाविद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित की जाएगी। इस योजना के तहत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में डिजिटल शिक्षण सुविधाओं को मजबूत करने के लिए करीब 45 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
स्मार्ट क्लास रूम और आईसीटी लैब की स्थापना से कॉलेजों में पढ़ाई का तरीका अधिक आधुनिक और प्रभावी हो सकेगा। डिजिटल उपकरणों और तकनीक की मदद से छात्र-छात्राओं को विषयों को समझने में आसानी होगी। साथ ही विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुचि भी बढ़ेगी और वे तकनीकी ज्ञान से अधिक जुड़ सकेंगे।
कॉलेज आयुक्तालय की ओर से इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद को लेकर संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब में लगने वाले डिजिटल उपकरण, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और अन्य तकनीकी संसाधनों की खरीद तय मानकों के अनुसार की जाएगी।
इस योजना को सुचारु रूप से लागू करने के लिए कॉलेजों की ओर से समितियों का गठन भी कर दिया गया है। ये समितियां स्मार्ट क्लास रूम और आईसीटी लैब के निर्माण तथा उपकरणों की स्थापना की निगरानी करेंगी। समिति की देखरेख में ही पूरे कार्य को पूरा किया जाएगा, ताकि सभी व्यवस्थाएं तय मानकों के अनुसार तैयार हो सकें।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सुविधाएं मिलने से सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ पढ़ने का अवसर मिलेगा। इससे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
उम्मीद जताई जा रही है कि बजट जारी होने के बाद जल्द ही इन परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। आने वाले समय में प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में स्मार्ट क्लास रूम और आईसीटी लैब तैयार होने से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा और विद्यार्थियों को डिजिटल युग के अनुरूप पढ़ाई की सुविधा मिल सकेगी।