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बीकानेर रेंज आईजी का बयान: सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, एक्सक्लूसिव फुटेज में देंखे दोषियों को सजा दिलाना प्राथमिकता

 

बीकानेर रेंज के आईजी ओमप्रकाश ने कहा है कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल आरोपी को पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि अदालत में मजबूत पैरवी के जरिए उसे सजा दिलाई जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संतुष्ट हो जाती है, लेकिन बाद में वही आरोपी अदालत से बरी हो जाता है, जिससे समाज और परिवादी खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

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आईजी ओमप्रकाश ने कहा, “अक्सर हम देखते हैं कि आरोपी को पकड़ने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती है और हम खुश हो जाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद पता चलता है कि जिसका चालान पेश किया गया, वह अदालत से बरी हो गया। यह स्थिति पुलिस और पीड़ित दोनों के लिए निराशाजनक होती है।”

उन्होंने बताया कि हाल ही में बीकानेर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए एक गंभीर मामले के आरोपी के संबंध में विशेष सावधानी बरती जा रही है। इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (पीपी) को शामिल कर जांच के मुख्य बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा की गई है, ताकि अदालत में केस मजबूत तरीके से प्रस्तुत हो सके और आरोपी किसी भी सूरत में बरी न हो।

आईजी ने कहा कि महिला अत्याचार और पॉक्सो (POCSO) से जुड़े मामलों में पुलिस विशेष संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ काम कर रही है। इन मामलों में लगातार फॉलोअप किया जाता है और प्रयास रहता है कि दोषियों को कठोरतम सजा मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्य, ठोस चार्जशीट और प्रभावी पैरवी जरूरी है।

ओमप्रकाश ने कहा कि महिला और बाल अपराधों के मामलों में पुलिस का लक्ष्य है कि दोषियों को फांसी जैसी सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रयास पहले भी अजमेर और पाली में किए गए हैं, जहां पुलिस और अभियोजन पक्ष के समन्वय से मजबूत पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने में सफलता मिली।

आईजी ने यह भी कहा कि पुलिस विभाग अब केवल केस दर्ज कर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रायल की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगा। इसके लिए अभियोजन अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं और जांच अधिकारियों को तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखना पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि आरोपी अदालत से बरी हो जाता है, तो पीड़ित पक्ष को लगता है कि उसे न्याय नहीं मिला। इसलिए अब प्राथमिकता इस बात पर है कि जांच निष्पक्ष, तथ्यपरक और कानूनी रूप से मजबूत हो, ताकि न्यायालय में केस टिक सके।

आईजी के इस बयान को पुलिस कार्यशैली में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां फोकस सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अंतिम सजा सुनिश्चित करने पर रहेगा।