बीकानेर PBM अस्पताल में एक और प्रसूता की मौत, वीडियो में जाने एक महीने में चार महिलाओं की जान गई; परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद भर्ती एक और प्रसूता की मंगलवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही पिछले एक महीने में किडनी फेल और मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन से जान गंवाने वाली प्रसूताओं की संख्या चार हो गई है। लगातार हो रही मौतों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
मृतका के पति मेघराज ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि डॉक्टरों ने इलाज के दौरान परिवार को सही और पूरी जानकारी नहीं दी।मेघराज के अनुसार, उनकी पत्नी कमला पिछले करीब एक महीने से अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थी। लगभग 15 दिन पहले उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था और पांच दिन पहले आईसीयू में ही उसकी ट्रेकियोस्टॉमी की गई थी।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को कमला के गले से काफी खून बह रहा था। दोपहर करीब 12:30 बजे डॉक्टर उसे यह कहकर ऑपरेशन थिएटर ले गए कि पैकिंग खोलनी है। करीब एक घंटे बाद उसे वापस आईसीयू लाया गया और शाम करीब 4:15 बजे परिवार को उसकी मौत की सूचना दे दी गई।परिजनों का आरोप है कि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि मरीज को ऑपरेशन थिएटर क्यों ले जाया गया और वहां कौन-सी चिकित्सा प्रक्रिया की गई।
'पुलिस ने शव जबरन ले गई'
मृतका के पति ने यह भी आरोप लगाया कि मौत के बाद पुलिस ने उनकी सहमति के बिना शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की कार्रवाई की। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई
वहीं, पीबीएम अस्पताल प्रशासन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल का कहना है कि महिला पहले से टाइप-1 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थी और उसकी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी।प्रशासन के अनुसार, मरीज का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा था और जरूरत पड़ने पर एम्स के विशेषज्ञों से भी लगातार सलाह ली जा रही थी। अस्पताल का दावा है कि महिला को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए।
एक महीने में चार प्रसूताओं की मौत से बढ़ी चिंता
पिछले एक महीने में पीबीएम अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अस्पताल में प्रसूता महिलाओं के इलाज, संक्रमण नियंत्रण और गंभीर मरीजों की देखभाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।फिलहाल मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन और संबंधित स्वास्थ्य विभाग स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं, परिजन पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोष तय करने की मांग पर अड़े हुए हैं।