भीलवाड़ा में बेटों की अनोखी सेवा, वीडियो में देखें 80 साल की नेत्रहीन मां को कांवड़ में बैठाकर 15 किमी पैदल ले गए मंदिर
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद क्षेत्र से मां-बेटे के रिश्ते की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। यहां बेटों ने अपनी 80 वर्षीय नेत्रहीन मां को कांवड़ में बैठाकर करीब 15 किलोमीटर पैदल यात्रा करवाई और उन्हें दर्शन कराने आंजना देव मंदिर ले गए। यह दृश्य देखकर गांव वाले भी भावुक हो गए। जिस रास्ते से बेटों ने कांवड़ उठाई, वहां लोगों ने उनकी सेवा और समर्पण की सराहना की।
जानकारी के अनुसार, सोहनी देवी की आंखों की रोशनी करीब पांच साल पहले चली गई थी। इसके बावजूद उनके मन में सागनी गांव स्थित आंजना देव मंदिर में दर्शन करने की गहरी इच्छा थी। उम्र और स्वास्थ्य की वजह से उनके लिए पैदल या सामान्य यात्रा करना संभव नहीं था।
मां की इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उनके बेटों ने खास तैयारी की। बेटा अहमदाबाद से बांस की एक विशेष कांवड़ लेकर आया, जिसे झूले की तरह आरामदायक बनाया गया ताकि मां को सफर के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। कांवड़ को इस तरह डिजाइन किया गया कि वह सुरक्षित और संतुलित रहे।
इतना ही नहीं, बेटों ने अपने दिवंगत पिता की मौजूदगी का एहसास दिलाने के लिए उनकी तस्वीर भी कांवड़ में साथ रखी। इससे मां को लगा कि पूरा परिवार उनके साथ इस यात्रा में शामिल है। करीब 15 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के दौरान बेटों ने बारी-बारी से कांवड़ उठाई और मां को पूरे सम्मान के साथ मंदिर तक पहुंचाया। रास्ते में लोग रुककर इस अनोखी सेवा भावना को देखते रहे और बेटों की तारीफ करते नजर आए।
बेटों का कहना है, “मां की इच्छा हमारे लिए आदेश के समान है। उन्होंने हमें जीवन दिया है, ऐसे में उनकी छोटी-सी इच्छा पूरी करना हमारा फर्ज है।” ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग अपने बुजुर्गों को समय नहीं दे पाते, वहीं यह घटना समाज को एक बड़ा संदेश देती है कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि संस्कारों और भारतीय पारिवारिक मूल्यों की मिसाल बन गई है। बेटों की इस सेवा भावना ने साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा सिर्फ मंदिर में नहीं, बल्कि मां-बाप की सेवा में होती है।