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भीलवाड़ा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा घोटाला, सहकारी तंत्र की पोल खुली

 

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से बड़ी और चौकाने वाली खबर सामने आई है। जिले की दांतड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले ने सहकारी तंत्र में बैठे कुछ अफसरों और पदाधिकारियों की सफेदपोशी सच्चाई को उजागर कर दिया है।

सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, भीलवाड़ा द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि योजना के तहत किसानों से किए गए प्रीमियम का सही उपयोग नहीं हुआ और कई मामलों में धन का दुरुपयोग हुआ। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई किसानों के नाम पर कागज़ों में फसल बीमा का लाभ दर्ज किया गया, लेकिन असल में उन्हें इसका कोई फायदा नहीं मिला।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस घोटाले में सहकारी समिति के कुछ पदाधिकारी और कर्मचारी सीधे शामिल पाए गए हैं। उनका कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज और रसीदें मिलीं, जिनसे धोखाधड़ी की पूरी कहानी सामने आई।

किसानों का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपने खेतों के बीमा के लिए प्रीमियम जमा किया था, लेकिन उन्हें ना तो कोई सूचित किया गया और ना ही किसी प्रकार का लाभ मिला। इस मामले ने किसानों में गुस्सा और असंतोष पैदा कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सहकारी समितियों में इस तरह की अनियमितताएं न केवल किसानों के हितों के खिलाफ हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक तंत्र को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने प्रशासन और बैंक अधिकारियों से अपील की है कि इस मामले में दोषियों को कठोर कार्रवाई के तहत सजा दिलाई जाए और किसानों के धन की वापसी सुनिश्चित की जाए।

सरकारी अधिकारियों ने भी कहा कि इस मामले की गहन जांच और फॉलो-अप कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घोटाले में शामिल सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसानों को उचित राहत दी जाएगी।

इस घटना ने राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सहकारी समितियों में पारदर्शिता, नियमित ऑडिट और कड़े निगरानी तंत्र के बिना इस तरह की योजनाएं अपने लक्षित लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पातीं।

भीलवाड़ा जिले में यह घोटाला किसानों और आम जनता के लिए चेतावनी का संकेत है कि सरकारी योजनाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन में लगातार निगरानी और जवाबदेही आवश्यक है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही दोषियों को सजा और किसानों को उचित लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

इस मामले ने यह भी दर्शाया कि सफेदपोश और उच्च पदस्थ अधिकारी भी यदि भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएं, तो ग्रामीण और कृषि क्षेत्र सीधे प्रभावित होते हैं। इसलिए पारदर्शिता और कड़े नियंत्रण के बिना किसी भी योजना का वास्तविक लाभ समाज तक नहीं पहुँच सकता।