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भीलवाड़ा की जहाजपुर तहसील: वीर सैनिकों की भूमि, देशभक्ति का गौरव

 

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर तहसील को यूं ही “वीर सैनिकों की भूमि” नहीं कहा जाता। यह वह पावन धरा है, जहां की मिट्टी में देशभक्ति रची-बसी है और हर गांव में तिरंगे की शान के लिए जीने-मरने का जज्बा पलता है। जहाजपुर तहसील के गांवों से निकलकर बड़ी संख्या में सेना और सुरक्षा बलों में भर्ती होकर यह वीर सपूत देश की सेवा कर रहे हैं।

स्थानीय लोग गर्व से बताते हैं कि जहाजपुर की संस्कृति में जवानों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित होती रही है। बच्चों को बचपन से ही स्वतंत्रता सेनानियों और सेना के योगदान की कहानियाँ सुनाई जाती हैं। इस वजह से तहसील का हर नागरिक देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य को समझता है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि जहाजपुर का भौगोलिक और सामाजिक वातावरण भी युवाओं को सैन्य सेवा की ओर प्रेरित करता है। यहां के ग्रामीण परिवारों में बहादुरी, अनुशासन और सेवा का महत्व बताया जाता है। यही कारण है कि जहाजपुर से हर साल बड़ी संख्या में युवक सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस सेवा में शामिल होते हैं।

गांवों में राष्ट्रीय उत्सवों जैसे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। स्कूलों और स्थानीय संस्थानों में छात्र-छात्राओं को देशभक्ति की शिक्षा दी जाती है। कई स्कूल और कॉलेज नियमित रूप से प्रतियोगिताएं, नाट्य मंचन और सामूहिक गीत आयोजन करते हैं, ताकि युवा पीढ़ी में देशभक्ति और साहस का जज्बा मजबूत हो।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि जहाजपुर के वीर सपूत न केवल सेना में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा और राहत कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं। इस तरह का सामाजिक और राष्ट्रीय योगदान इस तहसील की गौरवशाली पहचान को और मजबूत करता है।

इसके अलावा, जहाजपुर की मिट्टी में छुपी देशभक्ति का अनुभव केवल सुरक्षा बलों तक ही सीमित नहीं है। यहां की महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों, रक्तदान शिविरों और ग्रामीण विकास अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यह सामूहिक प्रयास इस क्षेत्र को समाज और राष्ट्र के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जहाजपुर तहसील का यह वीरता और सेवा का मॉडल पूरे जिले और राज्य के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने अपील की है कि इस तरह के क्षेत्रीय गौरव और सैनिक परंपराओं को दस्तावेजीकरण और प्रचारित किया जाए, ताकि अन्य युवा भी देशभक्ति और सामाजिक सेवा के लिए प्रेरित हों।

जहाजपुर तहसील की यह वीर भूमि साबित करती है कि देशभक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह वहां के नागरिकों के जीवन और संस्कारों में जिंदा रहती है। यह तहसील न केवल भीलवाड़ा जिले का गौरव है, बल्कि पूरे राजस्थान और देश के लिए वीरता, साहस और समर्पण का प्रतीक बनी हुई है।