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बाड़मेर के तेल क्षेत्र में गैस फ्लेयरिंग से घना काला धुआं, ग्रामीणों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ी

 

राजस्थान के बाड़मेर जिले के तेल उत्खनन क्षेत्र में गैस फ्लेयरिंग से उठता घना काला धुआं स्थानीय ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है। ग्रामीणों ने बताया कि धुएं के लगातार संपर्क में आने से उन्हें आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन हाल के महीनों में गैस फ्लेयरिंग की तीव्रता बढ़ने से हालात और गंभीर हो गए हैं। उन्होंने प्रशासन और तेल कंपनियों से मामले में सख्त कार्रवाई करने और प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार प्रदूषणपूर्ण धुएं के संपर्क में रहने से लंबी अवधि में फेफड़ों और आंखों पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने ग्रामीणों को सुरक्षा उपाय अपनाने जैसे कि मास्क का उपयोग और धुएं वाले क्षेत्रों से दूरी बनाने की सलाह दी है।

तेल क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि फ्लेयरिंग प्रक्रिया सुरक्षा और आपात स्थिति में की जाती है, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि धुएं के प्रभाव को कम करने के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय उपायों पर काम किया जा रहा है।

ग्रामीणों का जोर है कि केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें समय पर सूचना और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रशासनिक कदम भी चाहिए। इस मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर चर्चा जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इसे नियंत्रण में लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

यह स्थिति बाड़मेर में तेल उत्खनन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को स्पष्ट करती है।