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बाड़मेर में शिक्षकों की कमी पर छात्रों का हंगामा, वीडियो में देंखे स्कूल गेट पर दो घंटे धरना; आश्वासन के बाद माने विद्यार्थी

 

राजस्थान के बाड़मेर जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। सोलंकियों की ढाणी, बांकलपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को छात्रों ने शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर स्कूल के मुख्य गेट के बाहर धरना दिया। इस दौरान छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग की ओर से तीन शिक्षकों की व्यवस्था करने और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति का आश्वासन मिलने पर छात्रों ने धरना समाप्त कर कक्षाओं में प्रवेश किया।

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जानकारी के अनुसार, स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी समस्या को लेकर शनिवार को भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय अधिकारियों ने डेपुटेशन पर शिक्षकों की नियुक्ति का भरोसा दिया था, जिसके बाद छात्र और अभिभावक शांत हो गए थे।हालांकि, तय समय पर डेपुटेशन पर शिक्षक नहीं लगाए जाने से छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। सोमवार सुबह छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक फिर से स्कूल गेट पर एकत्र हो गए और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां करने की मांग उठाई।

छात्रों ने कहा कि सरकार "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का संदेश देती है, लेकिन जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे तो छात्राओं की पढ़ाई कैसे होगी। उनका कहना था कि शिक्षक नहीं होने के कारण कई विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है, जिससे विशेष रूप से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो रही है।प्रदर्शन की सूचना मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी देवाराम चौधरी स्कूल पहुंचे। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिलाया। करीब दो घंटे तक चली समझाइश के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल शिक्षण व्यवस्था के लिए तीन शिक्षकों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया। साथ ही संबंधित विषयों के शिक्षकों की जल्द नियुक्ति का भी आश्वासन दिया गया।

आश्वासन मिलने के बाद छात्र-छात्राओं ने धरना समाप्त कर दिया और वापस कक्षाओं में चले गए। हालांकि अभिभावकों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।यह मामला एक बार फिर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर शिक्षकों की नियुक्ति होने से ही विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सकेगी और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी बेहतर हो पाएगी।