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निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पर्यावरण प्रेमी को कंधों पर बैठाकर पैदल की पदयात्रा, फुटेज में जानें बालेसर में बिताई रात

 

शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गुरुवार रात बालेसर में आयोजित ओरण बचाओ पदयात्रा में एक अनोखी पहल की। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह को अपने कंधों पर बैठाकर लगभग एक किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। यह दृश्य स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया।

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भाटी ने पदयात्रा के दौरान न केवल पैदल चलकर पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि रात को पदयात्रियों के साथ ही जमीन पर सोकर अपने संघर्ष और समर्पण का उदाहरण भी पेश किया। उन्होंने कहा कि “एक रात घर से बाहर रहने पर फोन आ जाता है, लेकिन 32 दिन सबकुछ छोड़कर बैठना हंसी का खेल नहीं। मैं किसी पार्टी में नहीं हूं। न बीजेपी ने कुछ दिया, न कांग्रेस ने। सच के लिए आंख से आंख मिलाकर बात करनी पड़ेगी।”

निर्दलीय विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं है, बल्कि जो सही है वही कहना है। उन्होंने कहा, “यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए है। हमें अपने पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सच्चे कदम उठाने होंगे।”

भाटी की यह पहल स्थानीय समुदाय और पदयात्रियों के बीच प्रेरणा का स्रोत बनी। पर्यावरण और ओरण संरक्षण के लिए यह पदयात्रा लगातार चर्चा में है और भाटी के समर्पण ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि निर्दलीय विधायक का यह कदम यह दर्शाता है कि पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग भी नेता समाज और पर्यावरण के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकते हैं। भाटी ने अपनी बातों में साफ कहा कि उनके लिए सत्ता या राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण सत्य और न्याय है।

स्थानीय लोगों ने भी भाटी की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के संघर्ष और समर्पण से समाज में जागरूकता फैलती है। पदयात्रा के दौरान भाटी ने पर्यावरण प्रेमियों के साथ चर्चा की, और उन्होंने ग्रामीणों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व के बारे में बताया।

भाटी का यह कदम यह संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल आदर्श नहीं बल्कि व्यक्तिगत प्रयासों और समर्पण के माध्यम से वास्तविकता में बदला जा सकता है। उनके इस संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक उदाहरण माना जा रहा है।

रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता और समर्पण के माध्यम से न केवल पर्यावरण और ओरण संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि किसी राजनीतिक दल के समर्थन के बिना भी सच्चाई और न्याय के लिए खड़ा होना संभव है।