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बाड़मेर की धमकाने वाली महिला टीचर को सस्पेंड करने की उठी मांग, वीडियो में देखे ग्रामीणों ने बालोतरा कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

 

राजस्थान के बालोतरा जिले में एक सरकारी स्कूल की महिला टीचर द्वारा पेरेंट्स को धमकाने का ऑडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण को लेकर मंगलवार को क्षेत्र के आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए महिला शिक्षक सुशीला गुलेरिया को तत्काल निलंबित करने की मांग की।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल ऑडियो में सुशीला गुलेरिया पेरेंट्स को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल करवाकर धमकी देती सुनाई दे रही हैं। पेरेंट्स का आरोप है कि टीचर उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने और कानूनी कार्रवाई कराकर सजा दिलवाने की धमकियां दे रही हैं। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई है और इलाके में तनाव का माहौल बन गया है।

मंगलवार को ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल बालोतरा जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने शिक्षक के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि एक शिक्षक का यह व्यवहार न केवल नैतिक रूप से अनुचित है, बल्कि शिक्षा विभाग की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले भी शिक्षक द्वारा अभिभावकों और बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। अब जब धमकी भरा ऑडियो सबूत के तौर पर सार्वजनिक हुआ है, तो प्रशासन को तत्काल प्रभाव से निलंबन और जांच की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए

ज्ञापन सौंपते समय ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि शिक्षक के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।

इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिला कलेक्टर कार्यालय ने ज्ञापन प्राप्त होने की पुष्टि की है और कहा है कि मामले की जांच करवाई जाएगी

इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जवाबदेही और आचरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।

फिलहाल, सोशल मीडिया पर भी ऑडियो वायरल हो चुका है और लोग महिला शिक्षक के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों की मांग है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, शिक्षक को स्कूल ड्यूटी से हटाया जाए ताकि बच्चों और पेरेंट्स को मानसिक दबाव से राहत मिल सके।