बाड़मेर में डीपफेक वीडियो मामले के आरोपी को सम्मान मिलने पर विवाद, कलेक्टर ने पुरस्कार वापस लिया
बाड़मेर जिले में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान डीपफेक वीडियो मामले के आरोपी को सम्मानित करने के बाद विवाद खड़ा हो गया। बुधवार को दिनेश मांजू को वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया था। समारोह में मंत्री के.के. विश्नोई ने उन्हें प्रशस्ति पत्र भी दिया।
हालांकि, बाद में यह विवादित मामला बन गया क्योंकि दिनेश मांजू पर बयाना थाने में FIR दर्ज है। यह मामला बयाना विधायक ऋतु बनावत से जुड़ा हुआ है। विधायक ने आरोप लगाया कि मांजू ने डीपफेक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था। उन्होंने बताया कि उनके शिकायत देने के बाद उसके सहयोगी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन मुख्य आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर है।
निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत ने इस सम्मान के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि जिले का प्रशासन ऐसे व्यक्ति को सम्मानित कर रहा है, जिसने गंभीर अपराध किया है। उन्होंने कहा, “यह बेहद गंभीर मामला है और पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठता है। किसी आरोपी को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करना स्वीकार्य नहीं है।”
विवाद बढ़ने के बाद बाड़मेर कलेक्टर टीना डाबी ने गुरुवार रात आदेश जारी किया और दिनेश मांजू को दिया गया सम्मान वापस ले लिया। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ जांच के निर्देश भी दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि इस चूक को गंभीरता से लिया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के अनुसार, गणतंत्र दिवस समारोह में पुरस्कार देने की प्रक्रिया में कुछ औपचारिकताओं और जांच में चूक हुई। घटना के सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सम्मान रद्द कर दिया।
विधायक ऋतु बनावत ने इस मामले को लेकर कहा कि प्रशासन और अधिकारी जिम्मेदारी से काम करें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर कानून तोड़ने वाले या गंभीर अपराधों में शामिल व्यक्तियों को सार्वजनिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अपराध और सोशल मीडिया पर फेक वीडियो बनाना आजकल गंभीर अपराधों में गिना जा रहा है। ऐसे मामलों में आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है, और प्रशासनिक स्तर पर उन्हें सम्मानित करना गंभीर चूक मानी जाएगी।
बता दें कि यह मामला बाड़मेर जिले में प्रशासन और विधायक के बीच पहली बार नहीं है, जब किसी विवादास्पद सम्मान या पुरस्कार को लेकर बहस हुई हो। इस घटना ने जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया की भी परीक्षा ली।
अब संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस स्तर पर गलती हुई और भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने यह संदेश दिया है कि समाज और प्रशासन दोनों ही ऐसे मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। डिजिटल और सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों के संदर्भ में भी सार्वजनिक सम्मान देने से पहले गहन जांच और सत्यापन अनिवार्य है।