सिन्धु समझौता रद्द होने के बाद रविन्द्र सिंह भाटी ने PM को लिखा पात्र, पश्चिमी राजस्थान के लिए उठाई बड़ी मांग
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए सिंधु संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद राजस्थान के विधायक सिंधु नदी का पानी पश्चिमी राजस्थान में लाने की मांग कर रहे हैं। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का प्रबंधन किया जाना चाहिए। इससे लोगों, किसानों, पशुपालन और औद्योगिकीकरण को संबल मिलेगा।
इससे भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। आपको बता दें कि सिंधु संधि के निलंबन के बाद जोधपुर जिले के ओसियां विधायक भैरा राम सियोल ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नदियों को पश्चिमी राजस्थान में लाने की मांग की थी। अब शिव विधायक ने सिंधु नदी का पानी पश्चिमी राजस्थान के जिलों में लाने की मांग की है। पत्र में लिखा है कि पाक प्रायोजित चरमपंथियों द्वारा जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में पर्यटकों पर किए गए कायराना हमले के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों पर हुई कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला लिया गया। पूरा देश इसका तहे दिल से स्वागत करता है। समिति द्वारा लिए गए निर्णयों में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि सिंधु जल संधि 1960 को रद्द कर दिया गया है।
पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देता रहा है
भाटी ने पत्र में लिखा है कि आजादी के बाद से ही पाकिस्तान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देता रहा है। जिसमें भारत के निर्दोष नागरिकों और सेना के जवानों की जान गई है। ऐसे में भारत द्वारा पाकिस्तान को बहुमूल्य जल संसाधनों की आपूर्ति करना एक गंभीर सामरिक और नैतिक प्रश्न खड़ा करता है। यह जल संधि न केवल हमारे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ थी, बल्कि इससे हमारे देश के सभी नागरिकों में असंतोष और आक्रोश भी पैदा हुआ।
मानसूनी बारिश पर निर्भर पश्चिमी राजस्थान
पत्र में लिखा गया कि पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिले, जिनकी पूरी अर्थव्यवस्था कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। इस क्षेत्र में पीने के पानी की गंभीर समस्या है, जबकि कृषि को मानसून की बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। क्षेत्र के पशुपालकों को साल भर बारिश का पानी जुटाने और अपने पशुओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
पश्चिमी राजस्थान अक्षय ऊर्जा का हब है
भाटी ने कहा कि सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी को पश्चिमी राजस्थान की ओर मोड़ने की बहुत जरूरत है। इससे पेयजल, पशुपालन और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों तक पानी पहुंच सकेगा। इससे कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आएगा। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान अक्षय ऊर्जा का मुख्य हब बन गया है। पश्चिमी राजस्थान में विभिन्न स्थानों पर विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने सौर ऊर्जा पावर प्लांट लगाए हैं। भविष्य में इसमें और इजाफा होगा। इसके संचालन के लिए बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है। भूमिगत जल का उपयोग किया जा रहा है। लोगों के लिए उपलब्ध पानी का उपयोग पावर प्लांट में किया जा रहा है। इससे यहां के लोगों और पशुपालकों को भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।