अलवर में करणी माता मेले की शुरुआत, वीडियो में देखे वन क्षेत्र में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
अलवर के बाला किला के नीचे, सरिस्का बफर जोन के जंगल में स्थित करणी माता मंदिर में मेले की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे और आस्था का माहौल पूरे क्षेत्र में देखने को मिला।
मेले के शुभारंभ पर सुबह वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा ने मंदिर में पहुंचकर आरती की और पूजा-अर्चना की। इसके बाद सुबह 5 से 6 बजे के बीच ही सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंच गए। भक्तों का उत्साह इस बात से भी झलक रहा था कि कई महीनों से मंदिर तक पहुंच बंद थी।
दरअसल, पिछले साल हुई भारी बारिश के कारण मंदिर जाने वाला रास्ता पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके चलते श्रद्धालु लंबे समय तक मंदिर नहीं जा पा रहे थे। करीब 9 महीने बीत जाने के बाद भी सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सड़क की मरम्मत पूरी नहीं हो पाई है। इसके बावजूद, इस बार मेले के अवसर पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सीमित रूप से मंदिर जाने की अनुमति दी है।
हालांकि, यह पूरा क्षेत्र सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर जोन और टाइगर टेरिटरी के अंतर्गत आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लोगों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित रास्ते से ही मंदिर जाएं और किसी भी स्थिति में जंगल के अंदर जाने का प्रयास न करें।
वन विभाग और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में किसी प्रकार का व्यवधान न हो। क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है और लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरिस्का जैसे संरक्षित वन क्षेत्रों में इस तरह के आयोजनों के दौरान सावधानी बेहद जरूरी होती है, क्योंकि यहां बाघ और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही से खतरा पैदा हो सकता है।
फिलहाल, करणी माता मेले में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है, ताकि यह धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।