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कभी पेट भरने के लिए मांगी भीख, आज मिला पद्मश्री, वीडियो में देंखे अलवर के गफरुद्दीन मेवाती ने दुनिया में चमकाया राजस्थान का नाम

 

कहते हैं मेहनत और हुनर इंसान की किस्मत बदल सकते हैं। राजस्थान के अलवर निवासी गफरुद्दीन मेवाती की कहानी इसी बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। एक समय ऐसा था जब पेट भरने के लिए उन्हें दूसरों के सामने हाथ फैलाने पड़ते थे, लेकिन आज वही हाथ देश के प्रतिष्ठित ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित हुए हैं। गफरुद्दीन मेवाती को 25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। उनकी यह यात्रा संघर्ष, मेहनत और कला के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है। गफरुद्दीन मेवाती ने अपनी जिंदगी में गरीबी और अभावों का लंबा दौर देखा। उन्होंने बताया कि बचपन में परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि कई बार उन्हें भीख मांगकर पेट भरना पड़ता था। लेकिन कठिन हालातों के बावजूद उन्होंने अपने हुनर को कभी नहीं छोड़ा। भपंग वाद्य यंत्र को अपनी पहचान बनाकर उन्होंने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश और दुनिया में अपनी कला का परचम लहराया।

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राष्ट्रपति भवन में सम्मान मिलने के अनुभव को याद करते हुए गफरुद्दीन भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि कभी जिंदगी में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल था और आज राष्ट्रपति भवन में चांदी के बर्तनों में खाना खाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह पल उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था।गफरुद्दीन ने बताया कि समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उनके पास आए और हालचाल पूछा। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उन्हें पद्मश्री मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े नेताओं से मिलना और सम्मान पाना उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण बन गया।

गफरुद्दीन मेवाती भपंग वादन की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन दुनिया के 45 देशों में किया है। उनकी प्रस्तुति को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी खूब सराहना मिली है। खास बात यह है कि उन्होंने राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।भपंग राजस्थान का पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र है, जिसे बजाना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन गफरुद्दीन ने इसे अपनी जिंदगी बना लिया। वर्षों की साधना और समर्पण ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया जहां आज पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है।

उनकी सफलता की कहानी अब युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। गफरुद्दीन का कहना है कि जिंदगी में हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान अपने हुनर और मेहनत पर भरोसा रखे तो सफलता जरूर मिलती है।अलवर सहित पूरे राजस्थान में गफरुद्दीन मेवाती को पद्मश्री मिलने पर खुशी का माहौल है। लोग इसे राज्य की लोक कला और संस्कृति के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। गांव से निकलकर दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचने वाले गफरुद्दीन आज लाखों लोगों के लिए उम्मीद और संघर्ष की मिसाल बन चुके हैं।